
कोलकाता। सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर के रेप-मर्डर मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि इसमें सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि ताला थाना में झूठे रिकॉर्ड बनाए गए और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।
सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज लेडी डॉक्टर रेप-मर्डर मामले की जांच-पड़ताल करते हुए ताला थाने के प्रभारी अभिजीत मंडल और मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से हिरासत में पूछताछ की थी। इसके बाद सीबीआई ने अदालत को अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि उसकी जांच में कुछ नए फैक्ट भी सामने आए हैं। इनसे जाहिर होता है कि ताला थाना में इस मामले से संबंधित कुछ गलत रिकॉर्ड न सिर्फ बनाए गए थे बल्कि उन्हें बदला भी गया था।
बताते चलें कि जांच एजेंसी ने थाना प्रभारी मंडल को 14 सितंबर को हिरासत में लिया था, जबकि पूर्व प्राचार्य घोष को 15 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। सीबीआई ने बुधवार 25 सितंबर को एसीजेएम कोर्ट के समक्ष दावा किया कि ताला पुलिस स्टेशन के पूर्व प्रभारी अधिकारी अभिजीत मंडल और आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के बीच 9 अगस्त को अपराध वाले दिन कई बार बातचीत हुई थी। यही नहीं सीबीआई ने दावा किया है कि दोनों से हिरासत में की गई पूछताछ में नए और चौंकाने वाली बात सामने आई है। इन चौंकाने वाले खुलासों में पुलिस स्टेशन में कुछ दस्तावेजों को बदलने जैसी गंभीर बात भी सामने आई है।
दोनों आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की मांग
आरोपी मंडल और घोष की ओर से अदालत में पेश हुए वकीलों ने कहा कि सीबीआई आरोप लगाने की बजाय सबूत पेश करे। उन्होंने कहा कि रेप और मर्डर के बाद अस्पताल प्रमुख (घोष) का पुलिस थाना प्रभारी से बात करना स्वाभाविक सी बात थी। वहीं सीबीआई ने अदालत के समक्ष एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की और दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने की मांग भी की है। 17 सितंबर को सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट को एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच एजेंसी सबूत मिटाने व छेड़छाड़ किए जाने की संभावना को तलाशने में लगी हुई है।
केस डायरी पर उठी बात
आरोपियों के वकीलों ने सीबीआई पर सवाल किए और पूछा कि किससे पूछताछ की गई? इस दौरान मंडल के वकील अयान भट्टाचार्य ने तर्क करते हुए कहा कि रिमांड नोट में मंडल की रेप और मर्डर में संलिप्तता का उल्लेख ही नहीं था। वहीं आारोपी घोष के वकील जोहैब रऊफ का कहना था कि अदालत को सीलबंद लिफाफे पर विचार नहीं करना चाहिए। यदि वाकई कोई केस डायरी है, तो उन्हें उसी का हवाला देकर बात करनी चाहिए।
यहां सीबीआई ने बुधवार को अपूर्व बिस्वास से पूछताछ की है। बिस्वास कोई और नहीं बल्कि उसी पैनल के प्रमुख थे जिसने पीड़िता का पोस्टमॉर्टम किया था। एक अन्य डॉक्टर सुशांत रॉय को भी सीबीआई ने पेश होने को कहा था, लेकिन रॉय ने किसी भी प्रकार के समन मिलने से इनकार किया है।
