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युवक को पेश करने हाई कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश
जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने पुलिस को निर्देश दिया है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता के बंधक पुत्र को मुक्त कराकर पेश किया जाए। मामला खटवानी मोटर्स, जबलपुर के संचालकों को कर्मियों पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता के पुत्र को बंधक बनाने के आरोप से संबंधित है। प्रकरण की अगली सुनवाई 17 जुलाई को नियत की गई है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता अनूपपुर निवासी असीम कुमार बैरागी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने दलील दी कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता का पुत्र अमित बैरागी, शहडोल स्थित खटवानी मोटर्स के शोरूम में सेल्स मैनेजर के रूप में कार्यरत था। उसने टैक्स चोरी व चोरी की कार बेचने से मना कर दिया। वह अनैतिक गतिविधि में शामिल होने से इनकार के बाद नौकरी भी छोड़ने वाला था। उसने पर्दाफाश करने की चेतावनी दी थी। लिहाजा, उसे बंधक बना लिया गया। अब उसकी जान को खतरा है। 20 जून को बंधक बनाए जाने की शिकायत शहडोल के सोहागपुर थाने में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद बेटे को मुक्त कर दिया गया था। लेकिन बाद में खटवानी मोटर्स के संचालक राबिन ने हिसाब की रकम के साथ जबलपुर स्थित कार शोरूम में बुलाया था। बेटा 27 लाख रूपये लेकर अपनी कार क्रमांक सीजी 10 बीएफ 7152 में सवार होकर 29 जून को जबलपुर में शारदा चौक स्थित खटवानी मोटर्स के लिए रवाना हुआ था। खटवानी मोटर्स पहुंचने के बाद बेटे ने एक बार फिर अनुचित कार्य में सहभागी होने से मना करते हुए टैक्स चोरी व चोरी की कार बेचने के संबंध में पुलिस को सूचना देने की बात संचालक से कही थी। जिसके कारण संचालक व उसके कर्मचारियों ने बेटे को फिर से बंधक बना लिया। इस संबंध में उसके दोस्त से जानकारी प्राप्त हुई। जबलपुर पुलिस से शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है।

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