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ब्रिटेन में नहीं रुक रही पाक मूल के लोगों की कजिन मैरिज
लंदन। ब्रिटेन की एक स्टडी में पाया गया कि पाकिस्तानी मूल के 37 फीसदी विवाहित जोड़े पहले चचेरे भाई- बहन थे। जबकि 1 फीसदी से भी कम श्वेत ब्रिटिश जोड़े पहले चचेरे भाई- बहन थे। ब्रिटेन जैसे विकसित देश में भी जाकर पाकिस्तानी मूल के लोगों का एक पुरानी रीति के प्रति गहरा लगाव खत्म होता नहीं दिखता है।
यह नतीजा ‘बॉर्न इन ब्रैडफोर्ड’ स्टडी से आया है। जिसमें वेस्ट यॉर्कशायर शहर में परिवारों के स्वास्थ्य की जांच की गई थी। ब्रिटेन में हालांकि जन्म दोषों का जोखिम कुल मिलाकर अभी भी कम है। मगर स्टडी में पाया गया कि एकदम करीबी चचेरे भाई- बहनों की शादी से पैदा हुए शिशुओं के लिए उच्च जोखिम का संकेत दिया गया है। फिलहाल तो पाकिस्तानी और श्वेत ब्रिटिश जोड़ों पर ध्यान केंद्रित करने वाली स्टडी में फर्स्ट कजिन से शादी की दर में एक बड़ा अंतर पाया गया। ‘बॉर्न इन ब्रैडफोर्ड’ नामक स्टडी एक व्यापक परियोजना का हिस्सा था, जिसने 13,500 परिवारों के स्वास्थ्य को ट्रैक किया।
भारत में हिंदुओं के पुराने शास्त्रों और हिंदू विवाह अधिनियम-1955 के तहत कुछ खास रिश्तों के बीच विवाह करना कानूनन मना है। हिंदुओं में समान ‘गोत्र’ और ‘सपिंड संबंधों’ में विवाह करने की मनाही है। बहरहाल दक्षिण भारत में कुछ परिस्थितियों में करीबी रिश्तेदारों के बीच शादी की अनुमति होती है। हिंदू कानून के मुताबिक कोई भी इंसान अपने सपिंड संबंधों में शादी नहीं कर सकता। सपिंड संबंध का मतलब उन रिश्तेदारों से है जो पिता की ओर से 5 पीढ़ियों तक और मां की ओर से 3 पीढ़ियों तक जुड़े हों। लेकिन इसमें कुछ राज्यों, परंपरा और रीति-रिवाज के आधार पर कुछ छूट दी गई है।
जबकि उत्तर भारत में तो हिंदू समुदायों में एक ही गोत्र के अंदर विवाह नहीं हो सकता क्योंकि इसे भाई-बहन जैसा संबंध माना जाता है।उत्तर भारत में चचेरे, ममेरे, फुफेरे और मौसेरे भाई-बहनों के बीच शादी नहीं हो सकती है। जबकि दक्षिण भारत में विशेष रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में इस तरह की शादियां मान्य होती हैं। अगर कोई व्यक्ति स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करता है, तो वो अपने करीबी रिश्तेदारों से भी शादी कर सकता है। बशर्ते वे रिश्ते प्रतिबंधित रिश्तों की लिस्ट में न आते हों। स्पेशल मैरिज एक्ट एक धर्मनिरपेक्ष कानून है।

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