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आर्थिक तंगी के चलते पति और बेटी 2014 में लौट आए थे भारत
नई दिल्ली। केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी की सजा सुनाई गई है। केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया हत्या के जुर्म में 2017 से यमन की जेल में बंद हैं। हत्या मामले में ही यमन की कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। 16 जुलाई 2025 को उनकी फांसी की तारीख तय की गई है। निमिषा प्रिया की फांसी पर अब भारत की नजर है। भारतीय विदेश मंत्रालय निमिषा की सजा को रोकने या कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली है। अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 2011 में यमन गई थीं। उनके माता-पिता ने मजदूरी करके अपनी बेटी को यमन भेजा था। यहां उन्होंने नर्स का काम किया। निमिषा ने साल 2015 में यमन की राजधानी सना’आ में एक मेडिकल क्लिनिक खोला। इसमें एक स्थानीय स्पॉन्सर ने उनकी मदद की। इससे एक साल पहले उनके पति और छोटी बेटी 2014 में आर्थिक तंगी के कारण भारत लौट आए थे। यमन में निमिषा की जिंदगी मुश्किलों से घिरने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को अंधेरे से बचाने के लिए जो किया, उसकी की सजा वह अब भुगत रही हैं।
सैमुअल जेरोम और अदालती गवाहियों के मुताबिक तालाल ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए खुद को निमिषा का पति बताकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर लिया और धमकियां दीं। इन परिस्थितियों से तंग आकर साल 2017 में निमिषा ने यमन से भागने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने तालाल को बेहोश करने की योजना बनाई ताकि अपना पासपोर्ट वापस ले सकें, लेकिन दवा की ज्यादा मात्रा देने से तालाल की मौत हो गई। तालाल की हत्या के आरोप में निमिषा को गिरफ्तार कर लिया गया। साल 2018 में यमन की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

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