भव्य समापन 24 जुलाई को लखनऊ में होगा

हाथरस। श्री राधा कृष्ण कृपा भवन, आगरा रोड, हाथरस में आज उस समय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब ज्योतिषपीठाधीश्वर, द्वारका-शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का भव्य आगमन हुआ। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं, गौभक्तों, साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने उपस्थित सैकड़ों लोगों को गौरक्षा एवं गौसंवर्धन की शपथ दिलाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि सनातन जीवन मूल्यों, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने और गौवंश की रक्षा के लिए जनजागरण की आवश्यकता है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जुड़ना चाहिए। अपने प्रेरक उद्बोधन में शंकराचार्य जी ने वर्तमान में चल रही अपनी राष्ट्रव्यापी गौरक्षा मुहिम का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश की 403 विधानसभाओं में जनजागरण यात्रा के माध्यम से लोगों को जागृत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का भव्य समापन 24 जुलाई को लखनऊ में होगा, जहां प्रदेशभर से गौभक्त एवं सनातन धर्मावलंबी बड़ी संख्या में पहुंचकर गौमाता के सम्मान और संरक्षण का संकल्प दोहराएंगे। उन्होंने अपने संबोधन में हाथरस की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पहचान का भी विशेष उल्लेख किया। हाथरस की समृद्ध लोकसंस्कृति, ब्रज परंपरा, व्यापारिक प्रतिष्ठा तथा साहित्य और कला के क्षेत्र में उसके योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि सदैव धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना की वाहक रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक नगरों से ही राष्ट्र की आत्मा सशक्त होती है। श्री राधा कृष्ण कृपा भवन पहुंचने पर कार्यक्रम संयोजक शरद उपाध्याय नंदा एवं साहित्यकार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने माल्यार्पण कर जगद्गुरु शंकराचार्य का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
