संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिये गये अह्म दिशा-निर्देश

दमोह: जिले के थाना नोहटा क्षेत्र अंतर्गत नदी में मगरमच्छ के हमले से एक महिला की दुखद मृत्यु की घटना घटित हुई है। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा पूर्व में कार्यालय द्वारा संबंधित जल स्रोतों, नदियों, झरनों एवं अन्य संवेदनशील स्थलों पर चेतावनी एवं सावधानी बोर्ड लगाए जाने हेतु निर्देशित किया गया, साथ ही संबंधित विभागों को आयोजित बैठकों के माध्यम से भी इस विषय पर स्पष्ट निर्देश प्रदान किए गए थे, अतः जनसुरक्षा एवं भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना सुनिश्चित किया जाये।
जल स्रोतों की सूची एवं संवेदनशीलता का चिन्हांकन
कलेक्टर श्री कोचर ने वन मंडलाधिकारी दमोह तथा समस्त एस.डी.एम. से कहा है अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत स्थित नदी, तालाब, बड़े जलाशय, डेम व अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की पहचान कर उनकी संवेदनशीलता के आधार पर सूची तैयार की जाये। उन स्थलों को “उच्च जोखिम क्षेत्र” चिह्नित किया जाए, जहां पूर्व में मगरमच्छ देखे गए हों या संभावित हो तथा पशु व मानव क्षति की संभावना अधिक हो। उन्होंने कहा वन विभाग दमोह अपने अधीनस्थ अमले के माध्यम से जिले के ऐसे जल स्रोतों की पहचान करें जहां मगरमच्छ की उपस्थिति संभावित या पूर्व में देखी गई है। चिन्हित स्थलों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाये।
चेतावनी बोर्ड एवं संकेतक यंत्रों की स्थापना
उन्होंने संबंधितों से कहा चिन्हित जल स्रोतों पर स्पष्ट एवं बड़े फॉन्ट में चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाएं, जिनमें लिखा हो “सावधान”, इस जल स्रोत में मगरमच्छ की उपस्थिति संभव है। कृपया जल में प्रवेश न करें”। जिन स्थानों पर पर्यटकीय या धार्मिक गतिविधियां होती हैं, वहां अतिरिक्त रिफ्लेक्टिव साइनेज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
तैराकी, स्नान एवं पशु स्नान पर नियंत्रण
उन्होंने कहा चिन्हित जल स्रोतों जहां मगरमच्छ की उपस्थिति संभावित या पूर्व में देखी गई है में तैराकी, स्नान, मछली पकड़ना या पशुओं को ले जाने जैसी गतिविधियों आदि पर नियमानुसार पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाये जब तक कि क्षेत्र सुरक्षित न हो। ग्राम स्तरीय निगरानी दल बनाकर ऐसे स्थलों पर स्थानीय नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
