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दवा कंपनियों के चंदे का गोरख धंधा उजागर
जन विश्वास कानून 2023 के कारण नकली दवा बनाने वालों को नहीं होगी जेल

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा नकली दवाओं को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप लोकसभा चुनाव के पूर्व लगाए गए थे। जो सत्य साबित हो रहे हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की जांच रिपोर्ट में 53 दवाएं परीक्षण में फेल पाई गईं हैं। जो दवाइयां परीक्षण में नकली और गुणवत्ता विहीन पाई गई हैं। उनमें ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक्स, विटामिन्स और एंटीफंगल जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इस खुलासे से पूरे देश में हड़कंप मचा है, स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अखिलेश यादव ने बांदा की रैली मे भाजपा पर नकली दवाओं के कारोबारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पहले 500 एमजी की पैरासिटामोल से बुखार उतर जाता था, अब 650 एमजी की दवा भी असर नहीं करती है। अखिलेश ने नकली दवाइयां का मामला बीजेपी के घोटालों से जोड़ते हुए इसे जनता की जान के साथ खिलवाड़ बताया था।
सीडीएससीओ की जांच में हेटेरो ड्रग्स, अल्केम लेबोरेटरीज और हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स जैसी प्रमुख कंपनियों की दवाएं फेल पाई गईं। इन कंपनियों पर नकली दवाओं का उत्पादन करने का आरोप है। यह वही कंपनियां हैं, जो बीजेपी को भारी मात्रा में चंदा देती रही हैं। रिपोर्ट में 48 दवाएं नकली पाई गई हैं। जबकि 5 दवाओं को लेकर कंपनियों ने दावा किया है कि उनके नाम पर नकली दवाएं बेची जा रही थीं।
मोदी सरकार द्वारा 2023 में जन विश्वास बिल के तहत नकली दवाएं बनाने वाली कंपनियों को जेल जाने से बचने का रास्ता साफ हो गया है। अब दवा कंपनियां जुर्माना भरकर बच सकती हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 23 प्रमुख फार्मा कंपनियों ने बीजेपी को लगभग 762 करोड़ रुपये का चंदा दिया है, जिनमें टोरेंट, सिप्ला, और सन फार्मा जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इस खुलाशे के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। नकली दवाओं के इस कारोबार को बंद करने की मांग की है।
यह दवा घोटाला जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। नकली दवाओं की जांच रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है। जब चुनाव चंदे को लेकर जांच की मांग की जा रही है। इससे भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

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