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मोहाली। 1993 में हुई एक फर्जी मुठभेड़ में दो कांस्टेबलों की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी परमजीत सिंह को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जानकारी अनुसार अमृतसर के ब्यास थाने के तत्कालीन प्रभारी रहे परमजीत सिंह अब 67 वर्ष के हैं और पुलिस अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह मामला 1993 का है, जब बाबा बकाला के कांस्टेबल सुरमुख सिंह और खेला गांव के कांस्टेबल सुखविंदर सिंह को स्कूटर चोरी के शक में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें फर्जी मुठभेड़ में “अज्ञात आतंकवादी” बताकर मार डाला गया। सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश बलजिंदर सिंह सरा ने तीन अन्य आरोपियों – धरम सिंह (तत्कालीन निरीक्षक), कश्मीर सिंह (तत्कालीन एएसआई) और दरबारा सिंह (तत्कालीन एएसआई) को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं, एक अन्य आरोपी उप निरीक्षक राम लुभाया की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।
मामले की जांच 1995 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने अपनी जांच में खुलासा किया कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी थी और इसे असली दिखाने के लिए पुलिस ने झूठे दस्तावेज तैयार किए थे। मृतकों का बिना पहचान के जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए, जो 1993 से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं और उन्होंने इस लड़ाई में बहुत कुछ गंवाया है। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मोहाली को मुआवजे की प्रक्रिया पर विचार करने का आदेश दिया है।
सीबीआई के लोक अभियोजक अनमोल नारंग ने पीड़ित परिवारों की ओर से मामले की पैरवी की और न्याय सुनिश्चित कराया।

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