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……………….इन्हें स्थायी तौर पर बसाने की क्या योजना, सात दिन में बताएं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पाकिस्तान से आए दलितों की हालत पर गहरी चिंता जाहिर की है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि पाकिस्तान से निर्वासित होकर आए दलितों को सिर्फ भारतीय नागरिकता दे देना ही काफी नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसतरह के लोगों को रहने के लिए सम्मानजनक आवास की सुविधा उपलब्ध कराएं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर रोक लगाकर सरकार से चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पाकिस्तान से आए हिंदू दलितों को लेकर यह टिप्पणी दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज के पास मजनूं का टिला इलाके में रह रहे लोगों के विस्थापन की आशंकाओं के बीच की है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से आए इन निवासियों को लेकर कहा कि नागरिकता मिलने के बाद भी विस्थापन का खतरा इन लोगों पर मंडरा रहा है।
शीर्ष अदालत ने जोर दिया कि नागरिकता देने के साथ-साथ पुनर्वास और आवास की सुविधाएं भी उपलब्ध करना चाहिए है, ताकि इसतरह के लोग भी सम्मानजनक जीवन जी सकें। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के अंदर अपना जवाब दाखिल करे, साथ ही इलाके में ऐसी किसी भी अतिक्रमण हटाओ मुहिम या विकास परियोजनाओं पर रोक लगा दी है, जिससे इन परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो सकता है।
बात दें कि सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से करीब 250 परिवारों के करीब 1,000 लोगों को बहुत बड़ी राहत मिली है। ये वर्षों से इसी इलाके में रह रहे हैं। लेकिन, नई मुहिम के चलते उनके सामने आवास और पुनर्वास का संकट खड़ा हो गया और उनकी जिंदगी अनिश्चितता में उलझ गई है। जानकारी के अनुसार ये दलित हिंदू परिवार पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए थे। वर्षों तक देश में शरणार्थी का जीवन गुजारने के बाद इन्हें नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता दी गई है। अब केंद्र सरकार को अदालत को बताना होगा कि इन्हें भारतीय नागरिक बनाने के बाद इन्हें स्थायी तौर पर बसाने के लिए उसके पास क्या कोई योजना है?

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