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रिटायरमेंट के 15 साल बाद भी नहीं मिली ग्रेच्युटी और अन्य लाभ
जबलपुर।  जबलपुर के एक सेवानिवृत्त शिक्षक को रिटायर हुए 15 साल बीत जाने के बाद भी पेंशन और अन्य वैध रिटायरल लाभ नहीं मिले। विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो पीड़ित शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और आदेशों की अवहेलना पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही अदालत ने एक सप्ताह की अंतिम मोहलत देते हुए चेतावनी दी कि यदि जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित होना होगा। जबलपुर के सदर क्षेत्र निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक प्रकाश नारायण गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वे वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन अब तक उनकी वैध रिटायरल देनदारियां और पेंशन निर्धारित नहीं की गई हैं। भुगतान न होने के कारण उनके परिवार को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि वे दिव्यांग हैं और यह राशि किसी प्रकार की अनुकंपा नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद अर्जित उनका वैधानिक अधिकार है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।

अब तक नहीं मिला लाखों का भुगतान

याचिका के मुताबिक, प्रकाश नारायण गुप्ता को GPF राशि के 65,000 रुपए, 6वें वेतन आयोग का एरियर 1,07,000 रुपए, अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) के 1,70,000 रुपए और ग्रेच्युटी के 3,58,121 रुपए का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, उनकी पेंशन भी आज तक निर्धारित नहीं की गई। याचिकाकर्ता का दावा है कि वे दिव्यांग हैं, और बकाया राशि कोई दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद अर्जित वैध अधिकार है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने पूर्व आदेशों का पालन न होने पर जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने आदेश के पालन के लिए एक सप्ताह की अंतिम मोहलत दी और स्पष्ट किया कि यदि तय समय में जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को 17 फरवरी को अगली सुनवाई में उपस्थित होना होगा।

पहले भी दी गई थी चेतावनी

इससे पहले 12 जनवरी की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के वकील को निर्देश दिए थे कि डीईओ से स्पष्ट जानकारी लेकर शपथपत्र दाखिल किया जाए। कोर्ट ने पूछा था कि 7 फरवरी 2011 के पत्र के बाद क्या कार्रवाई हुई, जीपीएफ कटौती का पूरा विवरण जुटाया या नहीं, और क्या जानकारी संयुक्त संचालक लोक शिक्षण को भेजी गई। शपथपत्र दाखिल न होने पर व्यक्तिगत उपस्थिति की चेतावनी भी दी गई थी।

अगली सुनवाई पर नजर

मंगलवार की सुनवाई में डीईओ घनश्याम सोनी अदालत में उपस्थित हुए, लेकिन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जानकारी पेश नहीं की जा सकी। इस पर अदालत ने जुर्माना लगाते हुए एक सप्ताह का समय दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।

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