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हाई कोर्ट ने दमोह नगर पालिका के वार्ड घटाने पर लगाई मुहर
दमोह /जबलपुर । हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने दमोह नगर पालिका के वार्ड पुनर्निर्धारण को चुनौती देने वाली नगर पालिका अध्यक्ष की अध्यक्ष मंजू राय और समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह की याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि 39 वार्डों को घटाकर 29 करने की पूरी प्रक्रिया प्रविधानों के अनुरूप पूर्णतया वैधानिक है। इसमें किसी प्रकार की वैधानिक त्रुटि नहीं पाई गई है। प्राधिकारियों द्वारा प्रक्रिया के निर्धारण में कोई अवैधता (illegality/error) नहीं की गई है, इसलिए याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी जा सकती है। याचिका में दम (गुण-दोष) नहीं है और इसे तदनुसार खारिज (dismiss) किया जाता है।

राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ला ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पूरी प्रक्रिया मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम, 1961 की धारा 29 के तहत शुरू की गई। कलेक्टर के आदेशों के बाद राजस्व व पंचायत अमले से आंकड़े जुटाए गए, प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई और आम जनता से आपत्तियां आमंत्रित की गईं। आपत्तियों पर विधिवत विचार करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ताओं ने वार्डों के फिर से सीमांकन के सम्बन्ध में 15 दिसंबर, 2025 के प्रस्ताव और 17 दिसंबर, 2025 के नोटिस पर सवाल उठाये थे। पुनर्सीमांकन के तहत कुछ वार्डों का विलय किया गया, कई सीमाएं बदली गईं और लगभग आसपास के 12 गांवों को नगर पालिका में शामिल किया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई विहित नियम का उल्लंघन है। उनका कहना था कि नोटिस सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया और वार्ड नंबर-दो सहित कुछ वार्डों में जनसंख्या असंतुलन गंभीर है। हाई कोर्ट ने अभिलेखों का परीक्षण करके पाया कि नोटिस जारी करने से पहले सक्षम अधिकारी की स्वीकृति ली गई थी।

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