सुप्रीम कोर्ट ने सात साल पुराने मामले में हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार मामले में आईआरएस अधिकारी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति का मामले में मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने सिर्फ एक लाइन का फैसला सुनाते हुए मामले को रद्द कर दिया है। सीबीआई ने आदेश की कापी मांगी लेकिन समय पर नहीं मिली। सीबीआई का दावा है कि उसे विस्तृत आदेश तब मिला जब फैसला देने वाले जज रिटायर हो चुके थे। ये पूरा वाकया करीब साल साल पुराना है। अब सीबीआई ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मद्रास हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी है।
मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने सीबीआई के एक मामले में सिर्फ एक लाइन का आदेश दिया था। पूरा आदेश वेबसाइट पर तब अपलोड किया गया जब जज साहब रिटायर हो गए। सीबीआई ने दावा किया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी है। जज ने यह आदेश भ्रष्टाचार के एक मामले को रद्द करने के लिए दिया था। सीबीआई ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। यह मामला एक आईआरएस अधिकारी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति के मामले से जुड़ा है। सीबीआई ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय ओका और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस टी मथिवानन ने 15 मई, 2017 को इस मामले में एक लाइन का आदेश दिया था। उसी दिन सीबीआई ने आदेश की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया था। सीबीआई का आरोप है कि रजिस्ट्री ने उन्हें बताया कि जज के कार्यालय से विस्तृत आदेश अभी तक नहीं मिला है। जस्टिस मथिवानन 26 मई, 2017 को सेवानिवृत्त हो गए। सीबीआई को 26 जुलाई, 2017 को इस आदेश की प्रमाणित कापी मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे यह बताएं कि जज के कार्यालय से विस्तृत फैसला रजिस्ट्री को किस तारीख को मिला था और वेबसाइट पर कब अपलोड किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से जज की तरफ से सुनाए गए नौ मामलों की नए सिरे से सुनवाई के लिए कोई प्रशासनिक निर्देश था और क्या मौजूदा मामला उन 9 मामलों में शामिल था?
