
दमोह। सरस्वती कन्या विद्यालय के सभागार में हिन्दी लेखिका संघ की मासिक काव्य गोष्ठी वसुन्धरा तिवारी के आयोजकत्व में संपन्न हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ.रेवा चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ प्रेमलता नीलम रहीं। अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष पुष्पा चिले ने की। मां सरस्वती के पूजनोपरांत सरस्वती वंदना एवं कार्यक्रम संचालन वसुन्धरा तिवारी ने किया। प्रथम चरण में संस्था की प्रचार सचिव श्रीमती प्रेमलता उपाध्याय को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता (नवाचार) पुरस्कार प्राप्ति पर संस्था द्वारा स्मृति चिन्ह, शाल, श्री फल और पुष्प हार पहनाकर सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में पुष्पा चिले ने कहा कि बड़ा हर्ष का विषय है कि हमारी संस्था पदाधिकारी प्रेमलता उपाध्याय जी को मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा इतना बड़ा पुरस्कार प्रदान किया गया। मैं उन्हें अशेष बधाइयां और शुभकामनाएं देती हूं कि वे इसी तरह उन्नति पथ पर अग्रसर रहें और सम्मानित होतीं रहें। सभी बहनों ने उनके सम्मान में दो दो पंक्तियां समर्पित की।

दूसरे चरण में काव्य रस धारा ने ग्रीष्म तपन को कम किया। पुष्पा चिले ने कहा वृक्ष अनमने से खड़े,बेल लता मुरझाय। दोपहरी की आंच से, पाथर पिघले जांय। डॉ प्रेमलता नीलम बड़ी उमस है गली, कूचे और आंगन में, तपन तपन ही तपन है,वतन में और मन में। डॉ रेवा चौधरी बरगी आज भी बहता होगा, पर पानी में दर्द बसा होगा। प्रेमलता उपाध्याय प्रीत के प्राचीर अब तो गुनगुनाते गीत मेरे, भावना की खिड़कियों से झांक जाते गीत मेरे। डॉ संगीता पाराशर ने कहा भोर की पहली किरण से रात के अंतिम प्रहर तक, कर्म में संलग्न रहती वो हमारी प्यारी मां है। मधुलता पाराशर स्त्रियां बांध लेतीं हैं अपने आंचल में, सृष्टि की समस्त आशीषें। संगीता पान्डे गजलों में तेरा नाम सरे आम लिखूंगी, तूं सुबह को गर शाम कहे, शाम लिखूंगी। भावना शिवहरे होसलों की प्रीत मन में, जोश ये सब चाहिए, लक्ष्य हो सब सामने तब, गीत मधुर गाइए। पद्मा तिवारी हर दर्द की दवा है मां, सारा दुख ओझल हो जाता है, देती है अचूक शस्त्र, जिससे जीवन खिल जाता है। वसुन्धरा तिवारी मां की गोद से प्रभूत, यह सृष्टि जगत है प्रभूत। आराधना राय अपनों के साथ साथ जमाने से लड़ने लगती हूं, विवाह के बाद लड़की से मां बन जाती हूं जब। आभार पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।
