हाईकोर्ट पहले ही लोकायुक्त को 30 दिन में जानकारी देने और 5 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दे चुका है…
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता को नोटिस जारी……….

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम से मिली छूट पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या यह कोई खुफिया या सुरक्षा संगठन है, इसकारण लोकायुक्त संगठन को आरटीआई कानून 2005 की धारा 24(4) के तहत छूट दी जा सकती है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस की पीठ ने पाया कि मध्यप्रदेश सरकार रिकॉर्ड पर ऐसा कोई तथ्य पेश करने में विफल रही, जिससे साबित हो कि लोकायुक्त संगठन एक खुफिया या सुरक्षा एजेंसी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के स्पष्टीकरण के अभाव में, 2011 में जारी की गई छूट संबंधी अधिसूचना आरटीआई कानून की मूल भावना के विपरीत और कानूनी आधार में कमजोर प्रतीत होती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार के वकीलों के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अक्सर मध्यप्रदेश से जुड़े मामलों में सरकारी वकील मौजूद नहीं रहते। इस मामले में भी बहस खत्म होने के बाद बुलाए जाने पर वकीलों ने केस की पूरी जानकारी होने से इंकार किया। इस गंभीर स्थिति को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है। इसकी एक प्रति प्रदेश के लॉ सेक्रेटरी को भी भेजी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वकीलों के पैनल की समीक्षा करने को कहा है, ताकि अदालत में प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं करने वाले वकीलों पर निर्णय हो सके। गौरतलब है कि हाईकोर्ट पहले ही लोकायुक्त को 30 दिन में जानकारी देने और 5 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दे चुका है।
