
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के खिलाफ रेट्रोस्पेक्टिव वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाए जाने के सरकार के कदम को बरकरार रखा है. यह विवाद इस बात पर था कि क्या उनके प्लेटफॉर्म के जरिए से लगाए गए दांवों के पूरे मूल्य पर 28 फीसद जीएसटी लगाया जा सकता है या नहीं. न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने फैसला सुनाया कि इस तरह का जीएसटी संवैधानिक रूप से वैध है और जीएसटी को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक योजना का उल्लंघन नहीं करता है.
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जीएसटी अधिनियम के तहत वैधानिक अधिकार द्वारा इस कर को समर्थन प्राप्त है. सर्वोच्च अदालत ने आगे कहा कि अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों का हवाला देकर जीएसटी कर को अमान्य नहीं किया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग ऑपरेटर केवल सुविधा प्रदाता या मध्यस्थ नहीं हैं, बल्कि जीएसटी के दायरे में आने वाले कार्रवाई योग्य दावों के आपूर्तिकर्ता हैं.
बरकरार रहेंगे जीएसटी नियम
सर्वोच्च अदालत ने सीजीएसटी नियमों को बरकरार रखा, जो ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और कैसीनो के माध्यम से लगाए गए दावों के पूरे मूल्य पर जीएसटी लगाने का अधिकार देते हैं. इस विवाद के उद्योग पर काफी वित्तीय प्रभाव पड़ सकते हैं. त्रस्ञ्ज इंटेलिजेंस महानिदेशालय ने 71 ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के खिलाफ लगभग 1.12 लाख करोड़ की टैक्स मांग उठाई थी. कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुर्माना और ब्याज सहित कुल देनदारी बढक़र लगभग 2.3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है.
