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ओडिशा उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को किया रिहा …..निचली अदालत का फैसला पलटा
अनुगुल। ओडिशा उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध को बाद में दुष्कर्म का मामला नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति एस.के. पाणिग्राही की एकल पीठ ने आरोपी पंकज चौधरी द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा आरोपी को दी गई 10 साल की कठोर कारावास की सजा को रद करते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया है।
मामले के अनुसार, पीड़ित महिला के पति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 मई, 2022 को जब वह बाली यात्रा देखने गया था, तब आरोपी पंकज चौधरी ने उसके घर में घुसकर महिला के साथ दुष्कर्म किया। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जाजपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) ने जुलाई 2025 में पंकज चौधरी को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद पाया कि मामले की परिस्थितियां पूरी तरह से आपसी सहमति (कंसेंसुअल रिलेशनशिप) की ओर इशारा करती हैं। अदालत ने साफ कहा कि सहमति से बने संबंधों को बाद में नाराजगी या किसी अन्य वजह से दुष्कर्म का नाम नहीं दिया जा सकता। फैसले में कोर्ट ने मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि चिकित्सकीय परीक्षण में पीड़िता के शरीर पर संघर्ष या चोट के कोई निशान नहीं मिले।
इसके अलावा, घटना और एफआईआर दर्ज कराने के बीच हुई देरी को लेकर अभियोजन पक्ष कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। साथ ही, पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया कि आरोपी उसके पति का परिचित था और अक्सर उनके घर आता-जाता था। इन साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज कर पंकज चौधरी को बरी कर दिया।

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