
इन्दौर। विशेष न्यायाधीश राजेंद्र कुमार पाटीदार पीएमएलए न्यायालय ने इन्दौर नगर निगम के बहुचर्चित 103 करोड़ रुपए के फर्जी टेंडर और वर्कऑर्डर मामले के आरोपी निगम इंजिनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बडेरा को जमानत देने से इंकार करते उनकी याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने पीएमएलए की धारा 45 की कठोर जमानत शर्तों और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अपने आदेश में टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर फिलहाल यह संतोष नहीं है कि आरोपी प्रथम दृष्टया अपराध का दोषी नहीं है। गंभीर आर्थिक अपराध और समाज पर उसके प्रभाव को देखते हुए दोनों को जमानत देना उचित नहीं है। एडवोकेट चंदन ऐरन के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद मामले में 25 जून 2024 को नगर निगम में फर्जी टेंडर और वर्कऑर्डर जारी कर करीब 103 करोड़ रुपए की शासकीय राशि को अपराध की आय के रूप में हासिल कर आपस में बांटें जाने के मामले में केस दर्ज किया गया था। और मामले की जांच के बाद ईडी ने 24 जुलाई 2026 को 31 आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की धाराओं के तहत शिकायत पेश की है। जिसके बाद राठौर की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई दौरान तर्क दिया गया कि वह निगम में इंजीनियर थे, जांच पूरी हो चुकी है और लंबे समय से हिरासत में है। जिस पर ईडी ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए कहा कि आरोपी जिम्मेदार अधिकारी थे और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी टेंडर व वर्कऑर्डर के जरिए राशि के गबन में उसकी भूमिका सामने आई है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के पश्चात कोर्ट ने उक्त टिप्पणी के साथ जमानत देने से इंकार करते याचिका निरस्त कर दी।
