अनुच्छेद 142 के तहत राहत, जांच और नई एफआईआर पर रोक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 सितंबर का मार्च भी रद्द

नई दिल्ली । पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली समेत पांच राज्यों में दर्ज 129 एफआईआर को रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के बाद यह कार्रवाई हुई। सरकार ने आंदोलन वापस लेने की शर्त पर छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का वादा किया था। अब केंद्र के साथ बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम ने भी संबंधित मामलों को वापस लेने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने वापस लिया 5 सितंबर का विरोध मार्च वापस लेने की सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से संबंधित नई एफआईआर दर्ज करने पर भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रोक लगा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया। केंद्र सरकार यानी दिल्ली पुलिस के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम की ओर से दायर आवेदनों में चिन्हित एफआईआर भी आदेश के दायरे में शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मामलों को खत्म करने का आदेश दिया। अदालत ने साफ कहा कि रद्द की गई एफआईआर अब इतिहास हैं और इनके आधार पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च रद्द करने का फैसला किया है। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इसके बाद राजधानी में छात्रों के खिलाफ 13 एफआईआर दर्ज की गई थीं। वहीं बिहार में 69, महाराष्ट्र में 34, पश्चिम बंगाल में 8 और असम में 5 एफआईआर दर्ज हुई थीं। इस तरह पांच राज्यों में कुल 129 मामले दर्ज किए गए थे। छात्रों की मांग थी कि आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लिया जाए, ताकि प्रदर्शन में शामिल युवाओं के भविष्य पर मुकदमों का असर न पड़े।
