
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर लगातार बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ा निर्देश देकर कहा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को तुरंत हिरासत में लें और उन्हें खुले में घूमने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। यह सख्त टिप्पणी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई।
शीर्ष न्यायालय कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले में म्हात्रे की जमानत शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हालांकि, उनके वकील मुकुल रोहतगी ने बाद में अपनी याचिका वापस ले ली। महाराष्ट्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि उसने म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है, जिसके लिए अदालत ने नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से ठीक एक दिन पहले, पालघर जिले में भी एक अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई थी। आरोप है कि दही हांडी उत्सव के दौरान घायल एक व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी देने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कुछ पदाधिकारियों ने अस्पताल में हंगामा कर मारपीट की। सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति को अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट को थप्पड़ मारते हुए भी देखा गया, जब रिसेप्शनिस्ट ने बीच-बचाव की कोशिश की थी। इस मामले में पालघर पुलिस ने कम से कम 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें शिंदे गुट के कुछ सदस्य भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि 6 जुलाई को ठाणे के शास्त्रीनगर अस्पताल, कल्याण में इस तरह की घटना हुई थी। शिवसेना (शिंदे गुट) के कॉर्पोरेटर म्हात्रे ने अपने साथियों के साथ अस्पताल में प्रवेश कर एक गर्भवती महिला के इलाज और एनआईसीयू बेड न मिलने को लेकर हुए विवाद के बाद महिला डॉक्टर सहित तीन डॉक्टरों और स्टाफ पर हमला किया था। यह घटना महाराष्ट्र में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
