
नई दिल्ली। कर्नाटक हाईकोर्ट ने भरण-पोषण को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति से अलग रहने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता अपने आप नहीं मिल जाता। अदालत ने एक महिला की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए कहा कि पत्नी को यह साबित करना होगा कि उसके अलग रहने का उचित और वाजिब कारण था।
मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 1995 में हुई थी। कोरोना महामारी के दौरान पत्नी अपने बीमार माता-पिता और बहन की देखभाल के लिए मायके चली गई थी। बाद में पति ने उसे वैवाहिक घर वापस लौटने के लिए कहा, लेकिन वह वापस नहीं आई। पति के अनुसार, वह पत्नी को लेने उसके मायके भी गया था। इसके बाद पत्नी ने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने पति पर प्रताड़ना और क्रूरता के आरोप लगाते हुए अपनी दो बेटियों के साथ भरण-पोषण की मांग की थी। हालांकि, अदालत में इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। मैसूरु फैमिली कोर्ट ने पत्नी और बड़ी बेटी का भरण-पोषण दावा खारिज कर दिया था, जबकि छोटी बेटी के लिए हर महीने 8 हजार रुपये देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति डॉ. चिलकुर सुमलता ने हाईकोर्ट में कहा कि भरण-पोषण के लिए यह दिखाना जरूरी है कि पति ने पत्नी की देखभाल से इनकार किया या उसकी उपेक्षा की। साथ ही पत्नी के पास अलग रहने का उचित कारण भी होना चाहिए। अदालत ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
