नवोदय विद्यालय मामले में राज्य से कहा- सोच बदलने की जरूरत

नई दिल्ली। तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों की स्थापना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य की भाषा नीति को लेकर टिप्पणी की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से हिंदी को लेकर अपनी सोच पर पुनर्विचार करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई और दिल्ली के बीच अलगाव की सोच पर भी सवाल उठाया। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि चेन्नई में बैठे लोगों को दिल्ली में बैठे लोगों से अलग नहीं होना चाहिए और न ही दिल्ली को चेन्नई से अलग होना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और राज्य के बीच शिक्षा नीति से जुड़े मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया और इसे सहकारी संघवाद की भावना से जोड़कर देखा।
नवोदय विद्यालयों की स्थापना पर विवाद…..
मामला तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है। राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिसंबर 2025 के अपने उस आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया, जिसमें हर जिले में स्कूलों के लिए जमीन चिन्हित करने को कहा गया था। अब राज्य को तीन महीने में उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित सह-शिक्षा और आवासीय स्कूल हैं। इनका संचालन शिक्षा मंत्रालय के तहत नवोदय विद्यालय समिति करती है। तमिलनाडु में अब तक इन स्कूलों की स्थापना नहीं हुई है।
भाषा नीति पर राज्य की आपत्ति…….
तमिलनाडु सरकार की मुख्य आपत्ति नवोदय विद्यालयों में लागू तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर है। राज्य में दो-भाषा नीति के तहत तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, जबकि नवोदय विद्यालयों में हिंदी सहित तीन भाषाओं की व्यवस्था है। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने अदालत में कहा कि आपत्ति हिंदी पढ़ाए जाने मात्र से नहीं, बल्कि नवोदय की भाषा व्यवस्था से है। उनका तर्क था कि राज्य की शिक्षा नीति और तमिल भाषा से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
केंद्र-राज्य को बातचीत जारी रखने को कहा…..
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि योजना के तहत राज्य की मुख्य जिम्मेदारी जमीन उपलब्ध कराने की है, जबकि निर्माण और अन्य खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना अभी शुरुआती चरण में है और भाषा से जुड़े मतभेदों को आगे की बातचीत में सुलझाया जा सकता है। राज्य ने वित्तीय दायित्वों और जमीन की जरूरत को लेकर भी अपनी चिंताएं रखीं। अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत जारी रखने को कहा। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य अपनी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम जारी रख सकता है तथा नवोदय विद्यालय छात्रों के लिए एक अतिरिक्त शैक्षणिक विकल्प हो सकते हैं।
