
देवास । नाबालिग बेटी से गलत काम करने वाले सौतेले पिता को न्यायालय ने दिया आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। गोविंद प्रसाद घाटिया, उप-संचालक अभियोजन, जिला देवास, ने बताया कि घटना दिनांक 10.12.2024 को पीडि़त बालिका जिला देवास में अपने माता पिता के साथ मजदूरी करती थी उसकी मॉ उसके जैविक पिता को छोडक़र आरोपी के साथ रहने लगी थी और उसकी मॉ ने पीडि़ता से कहा था कि यही तेरे पिता है तो पीडि़ता उन्हें पिता ही मानकर साथ रहने लगी। कुछ दिन बाद ही सौतेले पिता ने पीडि़ता के साथ दुव्र्यवहार कर पीडि़ता के साथ गलत व्यवहार/बलात्संग किया और कई वर्षों तक करता रहा। पीडि़ता ने उक्त गलत काम के बारे में उसकी मॉ, बड़े पापा व बड़ी मॉ को भी बताया था पर उन्होने भी उसकी बात नहीं सुनी थी। सौतेले पिता द्वारा किये जा रहे अमानवीय कृत्य के कारण पीडि़ता गर्भवती हुई थी। पीडि़ता के गर्भवती होने की सूचना ‘आस संस्था’ जिला देवास को प्राप्त हुई थी। संस्था वाले पीडि़त बालिका को लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचे थे, जहां पर पीडि़त बालिका का परामर्श कर परामर्श रिपोर्ट तैयार की गई। बाल कल्याण समिति देवास द्वारा पीडि़ता की परामर्श रिपेार्ट के आधार पर जांच कराई गई थी। परामर्श रिपोर्ट के विवरण से आरोपीगण पिता, माता एवं पीडि़ता के बड़े माता पिता के विरूद्ध थाना बरोठा पर पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपेार्ट दर्ज की गई थी। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधि0) देवास में प्रस्तुत किया गया। विचारण उपरांत माननीय (श्री प्रसन्न सिंह बहरावत) विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम, जिला देवास द्वारा निर्णय पारित कर आरोपी पिता को धारा 65(1) भा.न्या.सं. एवं सहपठित धारा 3,4(2),5(एल)/6 पॉक्सो अधिनियम के अपराध में दोषी पाते हुये आजीवन कारावास की सजा व 5000/- रूपयें के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। उक्त प्रकरण में शासन की ओर से श्री आनंद कुमार नेमा, विशेष लोक अभियेाजक, जिला देवास द्वारा अभियोजन संचालन किया।
