शासन से नहीं हुआ फीस भुगतान तो रादुविवि ने एक्जाम में शामिल करने की नहीं दी थी अनुमति

जबलपुर । उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने परीक्षा शुरू होने में महज एक घंटा शेष रहते परीक्षा से वंचित होने का संकट सामने देख न्यायालय की शरण लेने वाले चार छात्रों के त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन पर तत्काल सुनवाई करते हुए रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही एकलपीठ ने मामले में विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने कहा है।
मामले में रादुविवि के छात्र शिवांकी तिवारी, राहुल दुबे, रितेश कुमार पांडे तथा तौफीक की ओर से अधिवक्ता देवेंद्र कुमार कुशवाहा व अंजलि तिवारी ने याचिका दायर की गई जिसमें बताया गया कि सभी छात्र रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूटीडी विभाग में एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम में अध्ययनरत हैं। उन्हें मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत प्रवेश मिला था। योजना के अनुसार पात्र स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को मेस खर्च और काशन मनी का भुगतान करना था, जबकि प्रवेश, नामांकन और परीक्षा शुल्क का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाना था। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से फीस का भुगतान नहीं किए जाने के आधार पर विश्वविद्यालय ने छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। शिवांकी तिवारी और राहुल दुबे दूसरे सेमेस्टर व रितेश कुमार पांडे और तौफीक अंतिम यानी चौथे सेमेस्टर में अध्ययनरत हैं। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि दाखिला देने वाला संस्थान स्वशासी है। छात्रों के अभ्यावेदन पर उन्हें पहले कुछ विषयों की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी, दूसरे सेमेस्टर के दो विषय और चौथे सेमेस्टर के एक विषय की परीक्षा होने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर छात्रों ने परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उच्च न्यायालय की शरण ली। परीक्षा दोपहर 12 बजे से निर्धारित थी। इस पर एकलपीठ ने पूर्वान्ह 11 बजे विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को बुलाकर छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए। एकलपीठ ने अपने आदेश में प्रथमदृष्टया कहा कि परीक्षा शुल्क के भुगतान को लेकर विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच आपसी विवाद है। सामान्य तौर पर इस भुगतान का भार छात्रों पर नहीं था। न्यायालय ने छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश देते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है। साथ ही स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने का परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
