ईओडब्ल्यू ने बैंक मैनेजर, सप्लायर, फर्मों के संचालकों सहित पॉच पर की एफआईआर

भोपाल । भोपाल में फर्जी दस्तावेज और नकली जीएसटी नंबर के जरिए फर्जीवाड़ा कर 10 लाख रुपये का एमएसएमई लोन लिये जाने का मामला सामने आया है। फरियादी कारोबारी की शिकायत पर जॉच के बाद ईओडब्ल्यू ने बैंक मैनेजर, सप्लायर, फर्मों के संचालकों सहित पॉच के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हे। इस फर्जीवाड़े में हैरानी वाली बात यह है की लोन के बदले बताई गई मशीन फरियादी को मिली ही नहीं। कारोबारी का आरोप है कि उसकी जानकारी के बिना उसके नाम पर 10 लाख रुपये का एमएसएमई लोन एप्रूव कराया गया। मशीन खरीदने के नाम पर जारी 8.85 लाख रुपये की रकम अलग-अलग खातों में पहुंचाई गई, लेकिन कारोबारी को मशीन नहीं मिली। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब कारोबारी को अपने नाम पर लिए गए लोन की जानकारी मिली। इसके बाद उसने ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी। जाँच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि शिकायतकर्ता के मामा (अब मृत) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर ब्रांच, भोपाल के शाखा प्रबंधक और मशीन सप्लाई करने वाली दो फर्मों के लोगों के साथ मिलकर फर्ज़ी कागजों के सहारे यह लोन पास कराया और लोन की 8,85 हजार रुपये की राशि मशीन के नाम पर निकालकर आपस में बाँट ली।
मामा ने बैंक और सप्लायर से मिलकर कराया लोन….
विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार कारोबारी के मामा ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के तत्कालीन मैनेजर और मशीन सप्लाई करने वाली फर्मों से जुड़े लोगों के साथ मिलकर लोन कराया। मामा की अब मृत्यु हो चुकी है। आरोप है कि उन्होंने पहले ही लोन से जुड़े दस्तावेज बैंक में जमा कर दिए थे। 21 मार्च 2024 को कारोबारी को बैंक बुलाया गया और तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। जांच में सामने आया कि आवेदन से रकम जारी होने तक की प्रक्रिया महज तीन से चार घंटे में पूरी कर दी गई। ईओडब्ल्यू के अनुसार बैंक ने न कारोबारी के व्यवसाय स्थल का निरीक्षण किया और न मशीन सप्लायर के पते का पर्याप्त सत्यापन किया।
पीड़ित की फर्ज और उसके परिवार वालो के एकांउट में भी नहीं मिली….
फर्म का पता फर्जी, जीएसटी नंबर अन्य के नाम पर रजिस्टर्ड लोन के लिए मार्जिन मनी जमा होने का रिकॉर्ड दिखाने के लिए 4 लाख और 1.15 लाख रुपये की दो रसीदें लगाई गई थीं। इनमें विशाल इंटरप्राइजेस को भुगतान दिखाया गया। जांच में इन भुगतानों की फर्म के बैंक खाते में एंट्री नहीं मिली। शिकायतकर्ता या उसके परिवार के खातों में भी इतनी रकम नहीं मिली। जांच में विशाल इंटरप्राइजेस का बैंक रिकॉर्ड में दर्ज पता भी फर्जी पाया गया। फर्म के दस्तावेजों में दर्ज जीएसटी नंबर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक बैंक के जीएसटी पोर्टल पर फर्म के मालिक का नाम अलग दिखाई दे रहा था। बैंक के अपने जीएसटी पोर्टल पर फर्म के मालिक का नाम अलग दिख रहा था, फिर भी शाखा प्रबंधक ने इसे नज़रअंदाज़ कर लोन पास कर दिया। फर्म का सत्यापन केवल कोटेशन पर लिखे मोबाइल नंबर पर फोन करके निपटा दिया गया।
मशीन के बजाय खातों में ट्रांसफर की रकम…
लोन की रकम मशीन खरीदने के लिए विशाल इंटरप्राइजेस के खाते में पहुंची, लेकिन शिकायतकर्ता को मशीन नहीं दी गई। आरोप है कि इसके बाद रकम ग्लोबल मार्केटर्स के जरिए शिकायतकर्ता की मां के खाते में भेजी गई और वहां से कारोबारी के मामा तथा उनके बताए लोगों के खातों तक पहुंची। जांच में 18 मार्च 2024 को 3.91 लाख और 22 मार्च को 3 लाख रुपये के ट्रांसफर की जानकारी सामने आई। लोन की रकम मिलने के दिन फाइनेंशियल एडवाइजर राजीव राजपूत को 50 हजार और शिकायतकर्ता के मामा को 2.46 लाख रुपये भेजे गए। फर्म के एक संचालक ने जांच में मशीन के बदले रकम भेजने और इस सौदे में 40 हजार रुपये मिलने की बात स्वीकार की।
बिना मशीन के ही बीमा और सीईआरएसएआई में रजिस्ट्रेशन….
विभाग के अनुसार मशीन मौजूद नहीं होने के बावजूद उसका बीमा कराया गया और सीईआरएसएआई में पंजीयन भी कर दिया गया। बीमा की रकम शिकायतकर्ता के खाते से काटी गई। बाद में उसका मामा और परिचित लोन की किस्तें भरते रहे और कारोबारी को लोन बंद होने की बात बताते रहे। जुलाई 2024 में बैंक से किस्त जमा करने के लिए फोन आने पर उसे पूरे मामले की जानकारी हुई। जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2024 में इसी शाखा से 10 से 15 दिन के भीतर इसी तरीके से पांच लोन कराए गए थे। तीन अन्य मामलों में भी गड़बड़ियां सामने आईं। एक प्रिंटिंग प्रेस संचालक को 9.90 लाख का लोन और 4 लाख की सीसी लिमिट मिली। एक महिला को 7 लाख का लोन दिया गया, लेकिन उसे मशीन नहीं मिली। वहीं एक युवक होम लोन के लिए बैंक पहुंचा था, लेकिन आरोप है कि उससे 2.40 लाख रुपये मार्जिन मनी के नाम पर लेकर उसकी इच्छा के बिना एमएसएमई लोन करा दिया गया। ईओडब्ल्यू के मुताबिक ये लोन बाद में एनपीए हो गए।
ईओडब्ल्यू ने बैंक मैनेजर सहित पांच पर कसा शिकंजा…
ईओडब्ल्यू भोपाल ने 17 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 99/2026 दर्ज किया। इसमें राहुल भोसले शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एम.पी. नगर शाखा, राजीव राजपूत, फाइनेंशियल एडवाइज़र, नईमा अली , प्रोप्राइटर, विशाल इंटरप्राईसेस, कमर अली, संचालक, विशाल इंटरप्राईसेस और उमर अली, प्रोप्राइटर, ग्लोबल मार्केटर्स को आरोपी बनाया गया है। सभी के खिलाफ धारा 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू अफसरो के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है।
