मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने संसद पर छोड़ा तय करने का काम

बेंगलुरु । कर्नाटक हाईकोर्ट में एक समलैंगिक जोड़े ने मांग की है कि देश के टैक्स कानून के तहत उन्हें सामान्य शादीशुदा जोड़े वाली टैक्स छूट दी जाएं क्योंकि ये संविधान में दिए गए समानता के अधिकार से जुड़े है। अब इस मामले में यह जोड़ा जिस तरह की मान्यता चाहता है, उसको तय करने का काम कोर्ट ने संसद पर छोड़ दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला बेंगलुरु का है जहां एक समलैंगिक लिव-इन पार्टनर ने परिवार की विरासत में मिले एक सोने के ब्रेसलेट को अपने साथी को रिश्ते की सालगिरह पर गिफ्ट में दिया और इस पर टैक्स लगा। उनको इस पर टैक्स देना पड़ा और इसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट ध्रुव-जैनसन-सांघवी ने कोर्ट में दलील दी कि भले ही वो समलैंगिक जोड़े हैं लेकिन उनके भी अधिकार हैं। अगर वह सामान्य जोड़े होते तो उन्हें ये हक सामान्य अधिकार के तौर पर मिलते। ये मामला कानून के अंतर्गत बराबरी के अधिकार का है और इसे केंद्र सरकार तक ले जाने की जरूरत नहीं है।
केंद्र सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा है कि जीवनसाथी को मिलने वाली छूट समलैंगिक पार्टनर को तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक उनके रिश्ते को कानूनी रूप से वैध शादी के तौर पर मान्यता न मिल जाए। देश के टैक्स कानून के तहत शादी को मान्यता मिले बिना समलैंगिक पार्टनर जीवनसाथी नहीं माने जा सकते। इस पिटीशन का असल मकसद समलैंगिक वैवाहिक रिश्ते को मान्यता दिलाना है जिसे टैक्स से जुड़े किसी प्रावधान की कानूनी व्याख्या के जरिए नहीं लिया जा सकता है।
बता दें ये जोड़ा 2019 से एक साथ रह रहा है और जिस ब्रेसलेट के ऊपर इस जोड़े को टैक्स देने के लिए कहा गया उसकी कीमत 1,15,500 रुपए है। जहां इनकम टैक्स कानून के तहत सामान्य शादीशुदा जोड़े को टैक्स नहीं चुकाना पड़ता वहीं इस मामले में इस जोड़े को टैक्स चुकाने के लिए कहा गया क्योंकि वो समलैंगिक हैं।
