Spread the love

नई दिल्ली । नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पुलिस कार्रवाई के आरोपों ने प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज की है। प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे कुछ पत्रकारों को हिरासत में लेने, धक्का-मुक्की करने और चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। इसी बीच, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की स्थिति पर चर्चा हो रही है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 के मुताबिक, नॉर्वे पहले स्थान पर है। नीदरलैंड दूसरे, एस्टोनिया तीसरे, डेनमार्क चौथे और स्वीडन पांचवें स्थान पर हैं। नॉर्वे लगातार दसवीं बार शीर्ष पर रहा है, जबकि इरिट्रिया 180वें स्थान पर है। सूचकांक में भारत को 157वां स्थान मिला है, जबकि 2025 में देश 151वें स्थान पर था। इस तरह भारत की रैंकिंग में छह स्थान की गिरावट दर्ज की गई। पड़ोसी देशों में पाकिस्तान 153वें, बांग्लादेश 152वें, श्रीलंका 134वें और नेपाल 87वें स्थान पर हैं। वहीं, चीन को 178वां स्थान मिला है।
रिपोर्ट में भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले कारकों में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, मीडिया स्वामित्व का कुछ समूहों तक सीमित होना और राजनीतिक दबाव जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनों के इस्तेमाल और कानूनी प्रावधानों के कथित दुरुपयोग को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। वैश्विक स्तर पर भी पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अनुसार, 2026 में दुनिया भर में प्रेस स्वतंत्रता का औसत स्तर पिछले 25 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका सात पायदान फिसलकर 64वें स्थान पर रहा, जबकि रूस 172वें स्थान पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *