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एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दस्तावेज जमा करने और दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य में एसआईआर के दौरान 33 फीसदी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप वाली याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता अरुण अनंदगिरि की याचिका पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ता अरुण आनंदगिरी की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। वहीं, याचिका से जुड़े दावों में पुणे और कुछ अन्य इलाकों में 40.6 फीसदी तक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने करीब 1.20 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगतियां बताई हैं। वकील ने अदालत को बताया कि मुंबई और पुणे में करीब 3,500 पुनर्विकास परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पुरानी आवासीय इमारतें तोड़ी जा रही हैं, जिससे हजारों लोगों को दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। ऐसे में पते और अन्य जानकारियां मेल नहीं खाने के कारण उनके नाम मतदाता सूची से कटने का खतरा है।


फॉर्म-6 पर भी उठाए सवाल…..
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहना गलत है। उनके मुताबिक, फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए होता है। उन्होंने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने और मामले की सुनवाई होने तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने पर रोक लगाने की मांग भी की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर अदालत को लगेगा कि कुछ लोग दस्तावेज दाखिल नहीं कर पाए हैं और समय बढ़ाने की जरूरत है, तो इस बारे में आदेश दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले भी एसआईआर से जुड़े मामलों में समयसीमा बढ़ाई गई है।
16 नवंबर को प्रकाशित होगी अंतिम सूची….


निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में एसआईआर का कार्यक्रम पहले ही संशोधित किया था। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर की गई थी। दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक जारी रहेगी। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अब 16 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित है।

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