
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने वैवाहिक मतभेदों का हवाला देकर 24 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगने वाली 34 वर्षीय महिला की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच मतभेद मात्र गर्भावस्था समाप्त करने के लिए वैध और पर्याप्त कानूनी आधार नहीं हो सकते। मामले में महिला ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उसके और पति के बीच वैचारिक मतभेद हैं। मौजूदा पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए वह बच्चे को जन्म देने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है। इसी आधार पर उसने 24 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महिला को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक मतभेद इतने गंभीर या असाध्य प्रतीत नहीं होते कि उन्हें किसी भी परिस्थिति में सुलझाया नहीं जा सकता। ऐसे में केवल वैवाहिक मतभेदों को गर्भपात की अनुमति देने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 सप्ताह तक या उसके बाद गर्भावस्था समाप्त करने के लिए मेडिकल बोर्ड की राय और कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों का होना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों और चिकित्सकीय मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है। इस मामले में गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देने योग्य कोई चिकित्सकीय या असाधारण परिस्थिति सामने नहीं आई। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने महिला की याचिका खारिज कर दी।
