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आम सहमति से चुना जाएगा भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष
नई दिल्ली। भाजपा के सदस्यता अभियान का प्रारंभिक चरण पूर्ण हो गया है। संगठन के अन्य चुनाव नवंबर माह तक निपटा लिए जाएंगे। दिसंबर माह में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा। इसके लिए अभी से जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। वर्तमान में मौजूदा राष्ट्रपति पूर्वी भारत से आती है। उपराष्ट्रपति पश्चिम भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रधानमंत्री उत्तर भारत से आते हैं। दक्षिण भारत के पास अभी कोई महत्वपूर्ण पद नहीं है। चारों दिशाओं को कवर करने,जाति और क्षेत्रीय समीकरण बिठाने के लिए, इस बार दक्षिण भारत से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन किया जाएगा।इस पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
दक्षिण भारत के जिन भाजपा नेताओं के नाम सामने आए हैं। उनमें पहलाद जोशी, एल मुरूगन, जी किशन रेड्डी, के अन्नामलाई, के ईश्वरप्पा तथा निर्मला सीतारमण के नाम पर चर्चा की शुरुआत हुई है।यह माना जा रहा है कि पहलाद जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पसंदीदा है। प्रधानमंत्री की कोशिश होगी, कि पहलाद जोशी के नाम पर संघ सहमत हो जाए। भाजपा के वरिष्ठ नेता का कहना है, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति के नाम पर संसदीय बोर्ड विचार करेगा। आम सहमति से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की कोशिश होगी। संगठन और सरकार के बीच समन्वय बना रहे। इसको ध्यान में रखते हुए नाम का चयन किया जाएगा। इस बार संघ भी खुलकर अपनी राय जाहिर कर रहा है। जिसके कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दक्षिण भारत से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर सहमति बन जाती है। ऐसी स्थिति में अभी तक जिन नामो पर चर्चा हुई थी।उनका कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा के चुनाव परिणाम और उपचुनाव के परिणाम भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को प्रभावित करेंगे। ऐसा माना जा रहा है पार्टी ने 15 दिसंबर के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने की समय सीमा तय की है।इसके पहले संगठन स्तर के सभी चुनाव हो जाएंगे, ऐसा माना जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि 50 फीसदी संगठन के चुनाव हो जाने के बाद 15 दिसंबर तक पार्टी अध्यक्ष का चुनाव आवश्यक रूप से आम सहमति से कर लिया जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव नहीं होगा।

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