
शुद्ध वायु न मिलना मौलिक अधिकार का हनन
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में तेजी से बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर नियंत्रण करने में विफल रहने पर केंद्र और राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है, कि शुद्ध हवा न मिलना लोगों के मौलिक अधिकार का हनन है, जो संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार देता है।
जस्टिस अभय एस. ओका की बेंच ने बुधवार को केंद्र और पंजाब-हरियाणा सरकारों से पूछा कि वे इस मौलिक अधिकार की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से पराली जलाने के मुद्दे पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि अधिकारियों ने नाममात्र की कार्रवाई की है। अदालत ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम को दंतहीन बना दिया गया है, जिससे कार्रवाई के प्रावधान कमजोर हो गए हैं। अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने लोगों को आदेशों का उल्लंघन करने का लाइसेंस दे दिया है।
वहीं, न्याय मित्र द्वारा आगाह किया गया है कि दिवाली के बाद दिल्ली एक गैस चैंबर बन जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़े कदम उठाने और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करने को कहा है, ताकि जनता के जीवन की गुणवत्ता सुरक्षित रहे।
