Spread the love


ऐसे आयोजन संयम, तप, त्याग, दया के भाव जाग्रत करते है – आर्यिका श्री
आर्यिका संघ का हुआ भव्य पिच्छिका परिवर्तन


रोहित साहू
हटा /वर्षायोग समापन के साथ ही नगर में चातुर्मास कर रहे आर्यिका संघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन षिवानंद भवन नावघाट पर आयोजित किया गया, इस धार्मिक आयोजन में दूर दूर से गुरूमां के भक्तजन आये।
कार्यक्रम का शुभारंभ बालिका मंडल के मांगलिक नृत्य मंगलाचरण के साथ हुआ। समाधिस्थ संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती षिष्या आर्यिका रत्न श्री मृदुमति माता जी एवं आर्यिका श्री निर्णयमति माता जी का वर्षायोग 2024 हटा नगरी में सम्पन्न हुआ, कलश स्थापना से प्रारंभ हुए चातुर्मास का समापन पिच्छिका परिवर्तन के साथ हुआ, आर्यिका रत्न श्री मृदुमति माता जी ने बताया कि अहिंसा धर्म के पालन के लिए एक ही स्थान पर रहकर चातुर्मास किया जाता है, संत के जो उपकरण है उसमें एक पिच्छी भी है, यह पिच्छिका मयूर पंख की होती है, कार्तिक मास में मयूर मोर स्वतः ही इन मोर पंख का त्याग करता है। इसलिए मोर पंख पूर्णतः निर्दोष है, इसमें किसी भी प्रकार की कोई हिंसा नहीं होती है। भक्त पंख का संग्रह करके ही पिच्छी का निर्माण करते है। इसमें पांच गुण विद्यमान होते है। यह लघु हल्की होती है, सुकुमार होती है, आंख पर भी स्पर्ष होने पर आंसू नहीं आते है। रज, धूल का ग्रहण नही करती है। जैन साधु संत एक वर्ष तक इसका उपयोग करके वर्षायोग के समापन अवसर पर इसे बदलते है। आर्यिका श्री ने पिच्छिका परिवर्तन समारोह एवं धार्मिक आयोजन के संबंध में कहा कि ऐसे आयोजन सदैव सभी के अंदर संयम, तप, त्याग, दया के भाव जाग्रत करते है। पिच्छि लेने व देने वालों को कुछ संयमी नियमों का पालन करना पड़ता है।
आर्यिका द्वय की पिच्छि लेने का सौभाग्य सुरेष कुमार, कमला दीदी झलौन जबलपुर एवं शाह कोमल चन्द्र अंजना जैन सादपुर वालों को मिला। इस अवसर पर नगर सकल जैन समाज के साथ कई जिला से गुरूमां भक्त आये हुए थे।
आयोजन में आचार्य श्री का पूजन हुआ जिसमें सकल जैन समाज एवं बाहर से आये अतिथियों के द्वारा अर्घ्घ समर्पित किये गये। चातुर्मास समिति के द्वारा सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यकक्रम का संचालन ब्रम्हचारी सुनील भैया एवं दीपक सेठ के द्वारा किया गया, ब्राहाचारिणी पुष्पा दीदी की भी विशेष उपस्थिति रही ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *