पूर्वजों ने कला, कौशल जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान देने का काम किया हैं, यह इतिहास आज के युवाओं को बताने की आवश्यकता-राज्यमंत्री श्री लोधी
यह इलाका अब अमन, चैन, सुख-शांति के साथ विकास का काम कर रहा-राज्यपिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष डाँ कुसमरिया
भारतीय ज्ञान परम्परा पर व्याख्यान सम्पन्न




दमोह : हम अच्छे नागरिक, अच्छे इंसान बने, जैसे ही हम अच्छे नागरिक अच्छे इंसान बन जाते हैं, हमारा धरती पर जन्म लेना सौभाग्यशाली हो जाता हैं। भारत की माता एक हैं “भारत माता” भारत की देवी “भारत माता” भारत की आराध्य “भारत माता” है। हमारा धर्म, जाति, वर्ग, वर्ण सब अलग हो सकते हैं लेकिन सबकी माता एक हैं “भारत माता”। अगर हम “भारत माता” के लिए कुर्बान, बलिदान सब कर देते हैं तो हमसे बड़ा सौभाग्यशाली कोई नहीं हैं। इस आशय के विचार देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रतिकुलपति डाँ चिन्मय पण्ड्या ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, ज्ञानचंद्र श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा पर व्याख्यान कार्यक्रम में व्यक्त किये। इस अवसर पर प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डाँ रामकृष्ण कुसमरिया, सांसद दमोह राहुल सिंह लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष विक्रांत सिंह चौहान एवं चन्द्रभान पटैल मंचासीन थे। कार्यक्रम का शुभांरभ गायत्री माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस मौके नशामुक्ति के लिये सभी को शपथ दिलाई गई।
प्रतिकुलपति डाँ चिन्मय पाण्ड्या ने अपने व्याख्यान में कहा जिसका दिल बड़ा होता हैं वह देवता होता है। जिंदगी की खूबसूरती बांटने से शुरू होती हैं। भारतीय संस्कृति को देखना, सुनना, समझना हो एक ही मंत्र को याद करने की आवश्यकता है उसका नाम है, बांटना। जिस दिन यह भाव आ गया उस दिन भारत को उठने में एक सेकंड का समय लगेगा। यदि हम खड़े हो जाएं तो दुनिया की संभावना को बदलने की स्थिति में आ सकते हैं, सभी में अपार संभावनाएं हैं। आज की समस्याओं के लिए गहरी संकल्प को लेने की आवश्यकता हैं। भारत का इतिहास गौरवशाली इतिहास हैं, जिन समस्याओं से हम जूझ रहे हैं, हर व्यक्ति को हम व्यसन से मुक्त कर सकते हैं, जो अल्कोहल से हो रहा है, जो इंटरनेट से हो रहा है, वह भी एडिक्शन हैं। व्यसन करने से शरीर, मान, परिवार, घर का पैसा, खुशियां, संस्कार और आने वाली पीढियां का सम्मान चला जाता हैं, हम एक जिम्मेदार परिवार को खो देते हैं।
उन्होंने कहा आज की तारीख में गायत्री परिवार 16 करोड़ परिवार हैं। मैं सभी से निवेदन करूंगा कि एक व्यक्ति को गोद लें, मन में संकल्प लें जो नशा करता हैं उसका नशा छुड़ाने का संकल्प लें, ऐसा करने से हमें भारत के भविष्य को उज्जवल करने से कोई रोक नहीं सकता। अवसर सौभाग्य तब बदलते हैं, जब हम उन्हें पहचानने का सामर्थ रखते हैं, जिस समय हम मिल रहे हैं, वह समय भारत के जागरण, भारतीय संस्कृति अभिमान, गौरव की बेला में हम सब की मुलाकात हो रही हैं। इंसान को इंसान बनाने की कोई एक भूमि रही । प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा हम अपनी भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा को जाने, पूर्वजों पर गर्व करें, उनके बारे में पढ़ें तो निश्चित रूप से हमें गौरव की अनुभूति होगी। श्री लोधी ने कहा इस महा विद्यालय से मेरा पुराना नाता हैं, बीएससी गणित एवं एमए यहीं से पढ़ाई की। एक गौरव के अनुभूति होती है कि जिस कॉलेज में मैं पढ़ा उसी कॉलेज के परिसर में आप सबके बीच में व्याख्यान देने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा निश्चित रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा एक उच्च परंपरा हैं, एक समय में देश विश्व गुरु हुआ करता था, विश्व गुरु की बात भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर ही होती हैं, आज के विद्यार्थियों के अंदर पश्चिम की अनुकरणीय की मनोवृत्ति दिखाई देती हैं, हमारी परंपराएं बड़ी उज्जवल रही हैं। पूर्वजों ने कला, कौशल जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान देने का काम किया हैं, यह इतिहास आज के युवाओं को बताने की आवश्यकता है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डाँ रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा यह इलाका अब अमन, चैन, सुख-शांति के साथ विकास का काम कर रहा हैं। गुरुदेव का ऐसा आशीर्वाद रहा लगातार मुझे यहां की जनता ने आशीर्वाद दिया और सांसद-विधायक बनाकर देश की सेवा करने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा चिन्मय पंड्या जी का आगमन इसी तरह होता रहे। दमोह की पवित्र धरती बहुत भाग्यशाली हैं कि ऐसे ऐसे महापुरुषों को आकर्षित करके यहां लाती हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ.पीके जैन एवं प्राचार्य पीएल जैन और महाविद्यालय के प्रोफेसर्स ने अतिथियों का स्वागत शाल-श्रीफल से किया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन की ओर से वीरांगना रानी दुर्गावती जी की प्रतिमा स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की गई। कृष्णा पटैल ने जागेश्वर महादेव का चित्र भेंट किया। आभार प्रदर्शन डॉ विक्रांत सिंह चौहान ने किया।
