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दोहरे अपराध में सात-सात साल की जेल, 10-10 हजार का जुर्माना
भोपाल। राजधानी के विशेष न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) नीतिराज सिंह सिसोदिया के न्यायालय ने बुधवार को व्यापमं घोटाले के एक मामले में सुनवाई पूरी होने पर आरोपी धर्मेंद्र शर्मा को दोहरे अपराध में दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कारावास सहित 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किये जाने के आदेश दिये है। मामले में एसटीएफ की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुनील श्रीवास्तव ने की। जानकारी के अनुसार साल 2013 में व्यापमं द्वारा आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में मुरैना निवासी धर्मेंद्र शर्मा पिता महावीर शर्मा का चयन हुआ था। बाद में उसके खिलाफ एसटीएफ को शिकायत मिली थी, कि उसने अपनी जगह साल्वर को बैठाकर परीक्षा उत्तीर्ण की थी। और आरक्षक भर्ती परीक्षा (प्रथम) में भी धर्मेंद्र फर्जी तरीके से शामिल हुआ था, लेकिन उस समय उसका चयन नहीं हुआ था। इसके बाद आरक्षक भर्ती परीक्षा वर्ष 2013 (द्वितीय) में आरोपित दोबारा फर्जी तरीके से शामिल हुआ और आरक्षक के पद पर चयनित हो गया। एसटीएफ की जांच में शिकायत सही पाए जाने पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला कायम कर आगे की जांच शुरू की गई। आरोपी धर्मेंद्र इंदौर में पदस्थ था, एसटीएफ ने उसे वहीं से गिरफ्तार किया था। जॉच के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान गवाहो के बयान और अन्य साक्ष्यो के आधार पर कोर्ट ने आरोपी धर्मेंद्र को दोनों परीक्षाओं में दोषी करार देते हुए दोहरी सजा सुनाई। उसे 7-7 सल के सश्रम कारावास सहित 20 हजार रूपये के अर्थदंड से दण्डित किया गया है। यहॉ उल्लेखनीय यह भी है कि कोर्ट ने 4 माह के रिकार्ड समय में ही सुनवाई पूरी करते हुए मामले में फैसला दिया है।

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