
नामांकन पत्र में संपत्तियां छिपाने का मामला
जबलपुर। हाईकोर्ट ने सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक एवं प्रदेश के खाद्यय नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत को बड़ी राहत देते हुए उनके नामांकन को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम, नामांकन पत्र या उससे जुड़े विवादों की सुनवाई का वैधानिक माध्यम केवल चुनाव याचिका है, ऐसे मामलों में सीधे रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव संबंधी विवादों के निपटारे के लिए कानून में विशेष व्यवस्था की गई है। इसलिए ऐसे मामलों में संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग नहीं किया जा सकता।
नामांकन में जानकारी छिपाने का लगाया था आरोप…..
यह याचिका सागर जिले के राहतगढ़ निवासी नीरज शर्मा ने दायर की थी, जिन्होंने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सुरखी सीट से गोविन्द सिंह राजपूत के खिलाफ चुनाव लड़ा था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विधायक ने नामांकन पत्र में अपनी संपत्तियों से संबंधित पूरी जानकारी नहीं दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर न्यायालय से कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की थी।
वैधानिक उपाय अपनाने की सलाह…….
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी, चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा तथा विधायक की ओर से अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय ने अपना पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव संबंधी विवादों के लिए चुनाव याचिका ही वैधानिक और प्रभावी उपाय है। इसी आधार पर रिट याचिका को खारिज कर दिया गया।
