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नई दिल्ली। अमेरिका में गौतम अडानी और उनके समूह पर 2200 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का आरोप लगने के बाद अडानी ग्रुप वैश्विक विवादों में घिर गया है। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दायर मामले के अनुसार, अडानी ग्रुप ने भारत में सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों को भारी रिश्वत दी। इस घटना ने न केवल भारत में, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी अडानी ग्रुप की परियोजनाओं को संकट में डाल दिया है। वहीं इस मसले पर अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर जोर दिया है। हालांकि, अमेरिकी जांच और बांग्लादेशी अदालत के आदेश ने समूह की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस विवाद का असर न केवल अडानी ग्रुप की परियोजनाओं, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार साख पर भी पड़ सकता है।
बांग्लादेश हाईकोर्ट ने अडानी ग्रुप के साथ हुए 25 साल के बिजली समझौते (पीपीए) की फिर से जांच का आदेश दिया है। झारखंड के गोड्डा में अडानी ग्रुप के पावर प्लांट से बांग्लादेश को सप्लाई की जा रही बिजली की दरें अत्यधिक होने का आरोप है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील शुरू से विवादास्पद रही है क्योंकि इसे निविदा प्रक्रिया के बिना मंजूरी दी गई थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे बांग्लादेश को बिजली भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
श्रीलंका में अडानी ग्रुप की बिजली परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद श्रीलंका को भ्रष्टाचार से बचने के लिए अडानी ग्रुप के साथ समझौतों की समीक्षा करनी चाहिए।केन्या ने पहले ही अडानी ग्रुप के साथ अपने ऊर्जा और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स को रद्द कर दिया है। इन विवादों ने अडानी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय साख पर गहरा असर डाला है। भारतीय शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है।

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