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पुलिस कमिश्रनर के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी करने का मामला

अब तक 150 सिमें दे चुके है सायबर ठगोरो को
भोपाल। सायबर क्राईम ब्रांच भोपाल टीम ने भोपाल पुलिस कमिश्रनर के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के चार आरोपियो को सिरोंज विदिशा से दबोचा है। पकड़े गये आरोपी गिरोह के मास्टरमांइड को फर्जी तरीके से सिमकार्ड चालू कर देते थे। एडीसीपी क्राइम ब्रांच शैलेंद्रसिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि बीती 5 नवंबर 2024 को भोपाल निवासी महेश कुमार ने सायबर क्राइम में लिखित शिकायत करते हुए बताया था की अज्ञात जालसाजो ने भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र के नाम से फर्जी आईडी बनाकर उसे पुराना फर्नीचर बेचने के नाम पर क्यूआर कोड भेजकर 45 हजार रुपये की ठगी की है। जॉच के बाद धारा-318(4), 319(2)बीएनएएस की धाराओ के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपियो की तलाश शुरु की गई थी।
तकनीकी जॉच के दौरान ठगी में उपयोग किये गये वाट्सएप नंबर, फेसबुक आईडी के उपयोगकर्ता के बारे में अहम सुराग मिले। जॉच के दौरान टीम ने ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमांइड को फर्जी तरीके से सिमकार्ड चालू कर देने बाले 4 आरोपियो की पह पकड़े गये आरेापियो में शामिल आकाश पिता बृजेश नामदेव (19 ) निवासी लटेरी जिला विदिशा, 10वीं तक पढ़ा है, जो सिम एक्टिवेट कर गिरोह के अन्य साथियो को बेच देता था। वहीं आरोपी राहुल पंथी पिता बाबूलाल पंथी (22) निवासी, सिरोंज जिला विदिशा, 12वीं तक पढ़ा है, वह आरोपी आकाश से खरीदी गई सिम गिरोह के अन्य सदस्यो को बेचता था। तीसरा आरोपी विवेक रघुवंशी पिता विनोद रघुवंशी (22) निवासी, सिरोंज जिला विदिशा ग्रेजुएट है, वह भी राहुल से सिम खरीदकर गिरोह के लोगो को बेचता था। चौथा आरोपी सोनू पिता हरी सिंह कुर्मी (22) निवासी, गरेठा जिला विदिशा भी ग्रेजुएट है, वो विवेक से सिम खरीद कर गिरोह के अन्य सदस्य असलम को बेचता था। चारो आरोपियो के कब्जे से टीम ने 4 मोबाइ, 36 सिम कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जप्त किये है। इस मामले में पुलिस पूर्व मे दो आरोपियो सुनील कुमार प्रजापति (24) और गिरोह के मास्टरमाइंड शकील को अलवर राजस्थान से गिरफ्तार कर चुकी है। शातिर आरोपियो ने भोपाल पुलिस आयुक्त के फोटो का उपयोग कर फर्जी फेसबुक आईडी बनाई और उनकी असली फेसबुक आईडी से जुड़े लोगों से दोस्ती की। इसके बाद वे मैसेंजर पर चैट के जरिये एक अन्य अधिकारी के ट्रांसफर का बहाना बनाकर सस्ते दामों पर फर्नीचर बेचने की बात करते थे। आरोपी व्हाट्सएप के जरिए कीमती फर्नीचर के फोटो भेजते थे, और इन्हें सस्ते दामों में बेचने का झांसा देकर बिल बनवाने और ट्रांसपोर्ट से भेजने के नाम पर फर्जी बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाकर धोखाधड़ी करते थे।

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