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उपभोक्ताओं को मनमाने बिजली बिल थमा रही बिजली कंपनी


भोपाल। सितंबर 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा बिजली की दरों में हुई बढ़ोतरी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घंटानाद आंदोलन के दौरान लोगों से अपील की थी कि वह बढ़े हुए बिजली के बिल ना भरें अगर उनकी बिजली कट जाए तो वे उनके कनेक्शन खुद जोडऩे आएंगे। लेकिन विडंबना यह है कि प्रदेश में बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से लगातार मनमानी कर रही हैं। राजधानी भोपाल हो या फिर राज्य को कोई दूसरा हिस्सा, हर जगह बिजली उपभोक्ताओं को मनमाने बिल थमाए जा रहे हैं। राजधानी भोपाल के छोला क्षेत्र में स्थित अटल नेहरू नगर की मंजू सोनी को 9 सितंबर को मीटर रीडर ने 161 यूनिट बिजली खपत का बिल 11,771 रुपए थमा दिया। बिजली बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए।
समाजसेवी और भाजपा नेता कैलाश सोनी कैलाश सोनी ने बताया कि बिजली के लिए मिलने वाली सब्सिडी के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं पर बिजली मीटर रीडिंग करने वाले लगातार दबाव बनाते रहते हैं। क्षेत्र में लोगों से कम बिजली बिल के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं और जो पैसा नहीं देता है, उसको इसी तरह के मनमाने बिजली बिल थमा दिए जाते हैं।
73 रुपए की एक यूनिट बिजली
मीटर रीडर द्वारा उपभोक्ता क्रमांक एन2444030126 को 09.09.2024 को मंजू सोनी, पता-11, अटल नेहरू नगर को मीटर क्रमांक-5171134 का जो बिल दिया गया है, उसमें वर्तमान वाचन 482 और पूर्व वाचन 321 यूनिट है। कुल बिल खपत 161 यूनिट बताई गई है। इसकी वर्तमान देयक 11771 रुपए बताई गई है। अगर इस हिसाब से देखा जाए तो उपभोक्ता को 73 रुपए से अधिक में एक यूनिट बिजली दी गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। समाजसेवी और भाजपा नेता कैलाश सोनी कहते हैं कि इस तरह के मामले हमारे पास बराबर आते रहते हैं।
चक्कर लगाकर थक जाते हैं उपभोक्ता
एक तरफ तो बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को मनमाने बिजली बिल थमा रही है। ऐसे में अधिक बिल आने पर उपभोक्ता उसमें सुधार के लिए कंपनी कार्यालय पहुंच रहे हैं। लाइन में लगने के बाद भी उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में सुधार एक औपचारिकता ही दिखाई दे रही है। इससे उपभोक्ता परेशान होकर कंपनी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बिजली कंपनी पहुंचने वाले लोग बिल लेकर इधर- उधर भटक रहे है। फिर भी समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है। बिजली के सुधार महज औपचारिकता बना हुआ है। ऐसे में उन गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। जिनको रीडिंग बिल के नाम पर बड़े-बड़े बिल थमा दिए गए हैं। अब जब उनके सामने घर परिवार का खर्च वहन करने का संकट है और उनकी जेब में काम बंद होने के कारण पैसा तक नहीं है।
मीटर रीडिंग में लापरवाही
मीटर रीडिंग का काम आउटसोर्सिंग के माध्यम से करता है। ठेका माध्यम से मीटर रीडिंग व बिल वितरण का काम किया जाता है। मीटर रीडरों की मनमानी के कारण इस तरह की स्थिति निर्मित हो रही है। विभागीय मानीटरिंग के अभाव में मीटर रीडरों की मनमानी जारी है। इसका खामियाजा सामान्य बिजली उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है।

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