पैसो के लेन-देन को लेकर की थी आरोपी ने हत्या
दमोह ! न्यायालय श्री आनंद कुमार तिवारी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पैसो के लेन-देन को लेकर सिर में कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया है! अभियोजन के मुताबिक फरियादी कालू रैकवार द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि वह -”ग्राम कुलुआ में रहता हूँ मेहनत मजदूरी का काम करता हूँ मेरे तीन लड़के है मझला लड़का जग्गी उर्फ जगदीश रैकवार उम्र 29 वर्ष का है जिसकी अभी शादी नहीं हुई है मेरे लड़के जगदीश ने गांव के नरेश सिंह गौड़ को कुछ दिन पहले 15000 रूपये उधार दिये थे जो दिनांक 25/06/23 के सुबह लड़का जगदीश को नरेश सिंह गौड़ ने उधारी के रूपये देने के लिये अपने घर बुलाया था, जो लड़का जगदीश उधारी के रूपये लेने नरेश के घर गया था जो नरेश के घर पहुंचा तो नरेश ने रूपये तो नहीं दिये और गंदी गंदी गालियां देने लगा तब जगदीश ने नरेश को गालिया देने से मना किया तो नरेश जगदीश के साथ लात घूंसों से मारपीट करने लगा तब गांव की कलाबती बाई ने मुझे आकर बताया कि नरेश तुम्हारे लडके जगदीश के साथ मारपीट कर रहा है तब मैं एवं मेरा लड़का घर पहुंचे तो नरेश अपने घर के आंगन में जगदीश के साथ हाथ में कुल्हाड़ी लेकर मारपीट कर रहा था और नरेश ने जगदीश को जान से मारने की नीयत से सिर में कुल्हाड़ी मार दी और नरेश कह रहा था इसको जान से खत्म करना है। फिर मैं मेरा लड़का मनोज, हल्लन एवं खट्ट रैकवार जगदीश को दमोह अस्पताल ले गये जगदीश के सिर में चोट होने से बेहोश था जिसे ईलाज के बाद जबलपुर रेफर कर दिया, फरियादी की उक्त रिपोर्ट पर अपराध पंजीबद्ध किया गया। ईलाज के दौरान आहत जगदीश की मृत्यु हो गई।
उक्त रिपोर्ट के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया, विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन, आरोपी के मेमोरेण्डम कथन, जप्ती एवं संकलित साक्ष्य के आधार पर संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
मामले में न्यायालय में आई मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी नरेश सिंह पिता अस्सू उर्फ अच्छेलाल उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम कुलुआ जिला दमोह कोभां.द.वि. की धारा 302 में आजीवन करावास एवं 2000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी जिला लोक अभियोजक श्री मुकेश जैन द्वारा की गई।

