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दमोह। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक  के अवसर पर परम पूज्य निर्यापक मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज एवम मुनि श्री 108 प्रयोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री मृदुमति माता जी ससंघ के मंगल सानिध्य में दोपहर 1 बजे से श्री जी की विशाल भव्य शोभायात्रा सिटी नल से प्रारंभ होकर पुराना थाना बाकोली चौराहा,घंटाघर, पलंदी मंदिर ,धगट चौराहा होते हुए सिंघई मंदिर पहुंची। जहां पर श्री जी का अभिषेक ,शांतिधारा, पूजन के पश्चात निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया प्रथम शांति धारा करने का सौभाग्य चंद्र कुमार सराफ कुंडलपुर कमेटी के अध्यक्ष के परिवार को प्राप्त हुआ मुनि श्री के  पद प्रक्षालन करने का सौभाग्य आरके जैन महामंत्री कुंडलपुर के परिवार को करने का  प्राप्त हुआ विभिन्न मंदिरों से पालकी में विराजमान करके लाई गई प्रतिमाओं की द्वितीय शांति धारा करने का सौभाग्य संतोष सिंघई पूर्व अध्यक्ष कुंडलपुर कमेटी के परिवार एवं तृतीय शांति धारा करने का सौभाग्य महेंद्र करुणा वेजीटेरियन परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री के निर्देशानुसार प्रत्येक घर से सवा किलो का एक निर्वाण लाड़ू लेकर अपने मंदिर जी के श्री जी की पालकी के साथ प्रत्येक मंदिर के पुरुष वर्ग धोती दुपट्टा में, महिला मंडल, बालिका मंडल, पाठशाला
 अपनी ड्रेस में बाजे गाजे के साथ मंदिर जी से सिटीनल पहुंचकर शोभायात्रा में शामिल हुए शोभायात्रा एवम समस्त कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर विभिन्न महिला मंडलों एवं संस्थाओं के पदाधिकारी ने आयोजन सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई शोभायात्रा को व्यवस्थित रूप से निकालने के लिए जैन मिलन नगर शाखा प्रमुख को जिम्मेदारी सौंप गई शोभायात्रा के दौरान भक्तगनों ने श्रद्धा पूर्वक मुनि संघ की आरती उतारी एवं पद प्रक्षालन किया अपने घरों के सामने रंगोली बैनर आदि लगाकर सजावट की।

शोभायात्रा सिंघई मंदिर में धर्म सभा में परिवर्तित हो गई सिंघई मंदिर के प्रांगण में सभी प्रतिमाओं को मंच पर एक साथ विराजमान किया गया जहां पर सामूहिक रूप से शांति धारा की गई शांति धारा उपरांत पूजन एवं निर्वाण कांड के पठन के पश्चात लाडू अर्पित किया गया रात्रि में सभी ने अपने घरों के सामने 16-16 दीपक जलाकर दूसरी दीपावली मनाने का उत्साह दिखाया भगवान जयकारों से संपूर्ण वातावरण गूंज गया इस अवसर पर आर्यका श्री मृदुमति माताजी एवं मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज ने भक्तगणों को अपना उद्बोधन प्रदान किया मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि युग के आदि में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव भगवान ने असी मसी कृषि वाणिज्य और शिल्प का ज्ञान मानव जाति के कल्याण के लिए दिया था उनके उस उपकार का हमें आभार मानना चाहिए उत्सव इतना उत्साह के साथ बनाना चाहिए कि दुनिया पूछे कि आज कौन सा त्यौहार है दमोह वाले देर से जागते हैं किंतु जग जाने के बाद कभी पीछे नहीं हटते आज के आयोजन से धर्म की बहुत मंगल प्रभावन हुई है बड़े आयोजन समय से नहीं बल्कि उत्साह और श्रद्धा से होते हैं दमोह वालों ने पुनः दिवाली मनाई है आज सभी लोगों को आदिनाथ निर्माण महोत्सव की बधाई देनी चाहिए यह सारे जगत की दिवाली होती है यदि सभी को समृद्धि पानी है तो आदिनाथ भगवान के निर्माण महोत्सव को मनाएं आदिनाथ भगवान जीवन संसार को सुखी और संस्कारित करने वाला होता है आदिनाथ भगवान ने संसारी व्यक्ति की समस्याओं का हल बताया मानव जाति को शर्टकर्म का उपदेश  दिया गृहस्ती वाले को एक बार अर्घ अवश्य चढ़ाना चाहिए दिगंबर जैन पंचायत को यह आयोजन प्रतिवर्ष बहुत धूमधाम से मनाना चाहिए कार्यक्रम को सफल बनाने मेंश्री दिगंबर जैन पंचायत सिंघई मंदिर समिति एवं जैन मिलन नगर शाखा प्रमुख एवं अन्य संस्थाओं के साथ सकल जैन समाज का सहयोग प्राप्त हुआ।

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