
लापरवाही को लेकर परिजनों ने उठाए सवाल
जबलपुर। जबलपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडीकल कॉलेज में डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां आईसीयू वार्ड में भर्ती मरीज को मृत घोषित कर दिया, जबकि वह जिंदा है और उसका इलाज चल रहा है| बताया गया है कि 66 वर्षीय मरीज इंद्रजीत शुक्ला को 26 जनवरी को रात 10 बजे मेडिकल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के सर्जरी आईसीयू वार्ड नंबर 32 में भर्ती कराया गया था और 27 जनवरी को अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जबकि वह जिंदा हैं और उनका इलाज चल रहा है।
बताया गया है कि इंद्रजीत शुक्ला को गंभीर स्वास्थ समस्याओं के चलते नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के आईसीयू में भरती कराया गया. बीते दिन डाक्टरों ने जांच के बाद इंद्रजीत शुक्ला को यह कहते हुए मृत घोषित कि श्वांसे थम चुकी है. इंद्रजीत शुक्ला को डॉक्टर के कहने पर परिवार वाले जब वार्ड से स्ट्रेचर पर शिफ्ट करने के बाद मर्चुरी ले जा रहे थे, तभी कुछ ऐसा हुआ कि सभी सहम गए|
बुजुर्ग के बेटे व बहू ने देखा कि मरीज की श्वांस चल रहीं हैं. उन्हें आभास हुआ कि पिता जी जिंदा है. इस घटना के बाद तुरंत ही मरीज के परिजन उन्हें लेकर वार्ड में पहुंचे. डॉक्टर को बताया गया कि जिन्हें मृत घोषित करते हुए डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया. वह अभी भी जिंदा है, उनकी श्वांस चल रही है. इस पूरी घटना के बाद बुजुर्ग को फिर से वार्ड में भर्ती कर लिया गया.
पहले निजी अस्पताल में हालत बिगड़ी …………….
मरीज के परिजनों का कहना है कि दस दिन पहले इंद्रजीत शुक्ला सीने दर्द की शिकायत के चलते एक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंकित अग्रवाल के पास गए. जहां तीन ब्लॉकेज सामने आने के बाद उन्होंने अपने ही अस्पताल में हार्ट की बायपास सर्जरी की गई. दूसरे दिन पेट दर्द और श्वांस लेने में तकलीफ होने लगी. जिसके बाद गले में ट्यूब लगा दी गई, पेट में इंजेक्शन भी लगाए गए. इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों से लाखों रुपए वसूल किए और जब हालात में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए.
मरीज की स्थिति देखते हुए दूसरे निजी अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया तो अस्पताल प्रबंधन ने इंद्रजीत को आनन.फानन में मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया. इस मामले को लेकर मेडिकल अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार डाक्टरों का कहना है कि मामले में सर्जरी विभागाध्यक्ष से जांच रिपोर्ट मांगी गई है.
पीड़ित के बेटे आयुष्मान शुक्ला ने इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई और इसे मरीज की जान के साथ खिलवाड़ बताया। आयुष्मान ने बताया कि ड्यूटी में तैनात महिला डॉक्टर ने आज उन्हें एक कागज थमा दिया जिसमे लिखा है आपके पिता की मौत हो गई। जिसके बाद वह सदमे में आ गए और भागते हुए वार्ड में पहुँचे जहां देखा कि पिताजी सही सलामत है।
