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कांदबरी जेठवानी के खिलाफ एफआईआर 2 फरवरी को दर्ज की गई थी


मुंबई। अभिनेत्री कादंबरी जेठवानी और उनके माता पिता को 40 दिन तक गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखना तीन बड़े पुलिस अफसरों को महंगा पड़ गया। इस मामले की जांच के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने इंटेलीजेंस चीफ पी सीताराम अंजनेयुलु (डीजी रैंक), विजयवाड़ा पुलिस कमिश्नर क्रांति राणा टाटा (महानिरीक्षक रैंक), और पुलिस कमिश्नर विशाल गुन्नी (अधीक्षक रैंक) तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। सरकारी आदेश में बताया कि इंटेलीजेंस चीफ पी सीताराम अंजनेयुलु सबूत के आधार पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जांच से पता चला कि अंजनेयुलु ने अन्य दो अधिकारियों को एफआईआर दर्ज होने से पहले ही महिला को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था।कांदबरी जेठवानी के खिलाफ एफआईआर 2 फरवरी को दर्ज की गई थी, जबकि उनकी गिरफ्तारी के निर्देश 31 जनवरी को जारी हुए थे।
कादंबरी जेठवानी ने अगस्त में एनटीआर पुलिस कमिश्न एसवी राजशेखर बाबू को एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में तीनों अधिकारियों पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता और फिल्ममेकर केवीआर विद्यासागर के साथ साजिश रचने का आरोप लगाया गया। कादंबरी जेठवानी शिकायत में यह भी बताया कि इस साल फरवरी में फिल्ममेकर ने उनके खिलाफ जालसाजी और जबरन वसूली का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद इन पुलिस अधिकारियों ने विद्यासागर के साथ मिलकर उन्हें और उनके पेरेंट्स को परेशान किया। इतना ही नहीं, उन्हें गिरफ्तार किया और बिना किसी पूर्व सूचना के मुंबई से विजयवाड़ा ले गए।
कादंबरी जेठवानी मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें और उनके बुजुर्ग माता-पिता को अपमानित किया और गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा, जिसके कारण उनके परिवार को 40 दिनों से अधिक समय न्यायिक हिरासत में बिताना पड़ा। कादंबरी जेठवानी के वकील एन श्रीनिवास ने आरोप लगाया कि विद्यासागर ने जेठवानी और उनके परिवार को फंसाने के लिए जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी की थी और पुलिस ने उन्हें कई दिनों तक जमानत याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी।

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