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आरोपियों में तत्कालीन टीएनसीपी अफसर, पूर्व संयुक्त संचालक, नोटरी और बिल्डर शामिल
इन्दौर । नजूल की जमीन पर इमारत तानने के मामले में तत्कालीन टीएनसीपी अफसर, पूर्व संयुक्त संचालक, नोटरी और बिल्डर सहित आठ लोगों को आरोपी बना ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज किया है। इस नौ साल पुराने मामले में आर्थिक अपराध विंग (ईओडब्ल्यू) ने विजय सांवलकर के साथ विवेक देवधर (वरिष्ठ भू- मापक), आरके सिंह (टीएनसीपी), किशोर सोनी (नोटरीकर्ता) और शत्रुघ्न कस्तूरिया (इंजीनियर), बिल्डर राकेश जैन और उसकी पत्नी मीनाक्षी तथा मां कंचन जैन को आरोपी बनाया है। फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से नजूल की जमीन पर बहुमंजिला इमारत तानने के इस मामले में बिल्डर राकेश जैन ने रोबोट चौराहा, खजराना स्थित सर्वे क्रमांक 543/2 की सरकारी जमीन दस्तावेजों में अपनी पत्नी मीनाक्षी और मां कंचन जैन के नाम दिखाते वहां पांच मंजिला इमारत का निर्माण करना शुरू कर दिया यही नहीं इमारत निर्माण के दौरान नजदीक की 11 हजार वर्गफीट नजूल की ज़मीन पर भी कब्जा कर टीएनसीपी से निर्माण अनुमति ले ली। अनुमति तत्कालीन संयुक्त संचालक विजय सांवलकर ने दी। हालांकि शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर की जांच उपरांत टीएनसीपी ने अनुमति निरस्त कर दी थी। लेकिन मामले में टीएनसीपी अफसरों की साठगांठ पाई जाने की जांच रिपोर्ट कलेक्टर ने शासन को भेज दी थी। मामले में बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में उजागर हुए इस मामले में जब ईओडब्ल्यू के तत्कालीन अफसरों ने रुचि नहीं दिखाई तब कलेक्टर ने जांच बैठाई तो जांच में टीएनपीसी के अफसरों की संलिप्तता पाई गई जिस पर कलेक्टर ने कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी। और इधर टीएनसीपी अफसरों ने निर्माण अनुमति निरस्त कर दी। कलेक्टर रिपोर्ट के बाद जब डीजी उपेंद्र जैन ने जांच की समीक्षा की तो मामला फिर सामने आया और मामले में ईओडब्ल्यू एफआइआर दर्ज कराई। मामले में हास्यास्पद और सबसे अहम् बात यह भी है कि अब सभी आरोपी अफसर सेवानिवृत्त हो गए हैं।

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