
सीबीआई ने कोर्ट में दी दलील कहा- हमारे पास पर्याप्त सबूत मौजूद
पटना। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें फिर बढ़ने वाली हैं। लालू के साथ ही अब उनके परिवार पर भी सीबीआई ने शिकंजा है। सीबीआई ने दिल्ली की एक कोर्ट से कहा कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम में अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
सीबीआई ने यह दलील विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष दी, जिन्होंने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी और पूर्व सीएम राबड़ी देवी और बेटे एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ मामले में आरोपों पर दलीलें सुनी। मामले में लगाए गए आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार शामिल हैं, जिसके लिए कम से कम सात साल की जेल हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि आरोप के पहलू पर सीबीआई की ओर से आंशिक दलीलें सुन ली गई हैं।
कोर्ट ने सीबीआई को मामले में दस्तावेजों की सूची पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश तीन आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिया है। आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं। यह मामला दो आईआरसीटीसी होटलों के संचालन के ठेके एक निजी कंपनी को दिए जाने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआई के आरोपपत्र के मुताबिक 2004 से 2014 के बीच एक साजिश रची गई थी, जिसके तहत पुरी और रांची में स्थित भारतीय रेलवे के बीएनआर होटलों को पहले आईआरसीटीसी को हस्तांतरित किया और बाद में इन्हें इसके संचालन, रखरखाव के लिए सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को पट्टे पर दे दिया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में धांधली और हेरफेर की गई और सुजाता होटल्स की मदद करने के लिए शर्तों में फेरबदल किया। आरोप-पत्र में आईआरसीटीसी के तत्कालीन समूह महाप्रबंधकों वीके अस्थाना और आरके गोयल और विजय कोचर एवं विनय कोचर, दोनों सुजाता होटल के निदेशक एवं चाणक्य होटल के मालिक हैं। डिलाइट मार्केटिंग कंपनी, जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोप-पत्र में आरोपी कंपनी के तौर पर नामजद किया है।
