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कॉग्रेस और नपा अध्यक्ष जनता को गुमराह कर, अधिनियम की धारा 61 का सहारा ले अपने प्रस्ताव पारित कराने का सुनियोजित षड्यंत्र था – विजय जैन

दमोह – भारतीय जनता पार्टी के नगर पालिका दमोह के पार्षद गणों ने जिला उपाध्यक्ष रमन खत्री, नेता प्रतिपक्ष विजय जैन, कपिल सोनी, यशपाल सिंह, नितिन चौरसिया, अमित त्यागी, मनीष शर्मा, भाजपा मीडिया प्रभारी राघवेंद्र सिंह परिहार, सह प्रभारी महेन्द्र जैन विवेक सेन, विवेक अग्रवाल, सतीश जैन, मोनू राजपूत, टोनी राय, साधना तिवारी, हिमानी पारोचे, संजय कुशवाहा की उपस्थिति में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें कॉग्रेस शासित नगर पालिका दमोह द्वारा दमोह में पशु वध केंद्र खोलने के संबंध में प्रस्ताव पर विस्तृत जानकारी दी।  रमन खत्री ने कहा कि कॉग्रेस शासित नगर पालिका ने बहुत ही षड़यंत्र पूर्ण तरीके से नगर पालिका परिषद के सम्मेलन में पशु वध केंद्र में माननीय उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका क्र. 28057/2024 मुर्रसलीम कुरैशी विरूद्ध मप्र शासन एवं अन्य में पारित आदेश दिनांक 4.12.2024 के निर्णय की सूचना परिषद के सम्मेलन में जोड़ी गई। यह इनकी चाल है यह पशु वध केंद्र खोलने के पक्ष में थे भाजपा और जनता के विरोध के कारण ये अब अपने ही निर्णय से पलट गये हैं। यह जनता की जीत हैं। 

नेता प्रतिपक्ष विजय जैन ने कहा कि 25 फरवरी 2025 को नगर पालिका परिषद का जो सम्मेलन बुलाया गया वह नगर पालिका उपाध्यक्ष सुषमा विक्रम सिंह के लेटर हेड पर जो सम्मेलन बुलाने की मांग की गई थी परंतु सम्मेलन में उपाध्यक्ष के द्वारा दिए गए सुझाव और बिंदुओं पर विचार नहीं किया गया केवल अध्यक्ष के द्वारा सम्मिलित बिंदु ही रखे गए इससे यह स्पष्ट होता है कि नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यप्रणाली तानाशाह हैं। इन्होंने सम्मेलन के बिंदु क्रमांक 7 में केवल पशुवध केंद्र के संबंध में सूचना की जानकारी बताई गई कोई अधिक जानकारी नहीं दी गई इससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस शासित नगर पालिका और अध्यक्ष पशु वध के पक्ष में ही थे जनता को गुमराह करने के लिए यह विरोध की बात कर रहे है। इनकी यह पूर्व नियोजित योजना के तहत अधिनियम की धारा 61 के तहत कोरम पूरा कर अपने प्रस्ताव पारित करना चाहते थे। 

कपिल सोनी ने कहा कि कॉग्रेस, नपा अध्यक्ष और उनके पार्षदों को दमोह की जनता की समस्याएं और विकास से कोई सरोकार नहीं है वह केवल अपने और अपने चहेते ठेकेदारो को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने का कार्य करते हैं। 25 फरवरी के बाद 27 फरवरी को सम्मेलन में हम सभी अपनी बात रखते लेकिन सम्मेलन रद्द हो गया। हमारी मांग है कि पशु वध केंद्र के संबध में सम्मेलन बुलाया जाये और अन्य बिंदुओ के लिए बाद में पुनः सम्मेलन आयोजित हो।  यशपाल सिंह राजपूत ने कहा कि सीएमो परिषद का सचिव अधिकारी होता है, बिना उसकी सहमति से सम्मेलन नही बुलाया जा सकता और ना ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन प्रस्ताव क्र 5 एवं 8 की संक्षेपिका पत्र में सीएमओ के हस्ताक्षर नहीं है। नियम अनुसार परिषद का रजिस्टर 7 दिवस के अंदर सीएमओ के पास आना चाहिए और उसी अनुसार नियमबद्ध कार्य होना चाहिए लेकिन रजिस्टर अध्यक्ष अपने घर पर रखती है इनके स्वयं के सभापतियों को निर्णयों की जानकारी नहीं देती।

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