
जबलपुर। हाईकोर्ट ने राज्य शासन को एसडीओ के उस आदेश का पालन सुनिश्चित करने कहा है िक जिसमें बेटे को विवादित संपत्ति अपने पिता को सौंपने कहा गया है। इस मत के साथ जस्टिस विवेक अग्रवाल ने बेटे द्वारा दायर याचिका निरस्त कर दी। साथ ही याचिकाकर्ता बेटे पर 10 हजार रुपए की कॉस्ट भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता बेटे का केवल एक ही मकसद है कि वह इस मामले को कानूनी उलझनों में उलझाए रखे, जोकि वह 2020 से लगातार कर रहा है। अदालत इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकती, खास तौर पर तब जब किसी वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा का सवाल हो। शहडोल निवासी चक्रधर द्विवेदी व अन्य ने याचिका दायर कर दलील दी कि बांके गांव में उसके दादा रामकिशोर को 0.68 हेक्टेयर भूमि दी गई थी। चूंकि यह पैत्रक संपत्ति है, इसलिए अकेले उसके पिता जगदीश प्रसाद उस पर दावा नहीं कर सकते। दरअसल, जगदीश ने एसडीओ के समक्ष आवेदन देकर कहा था कि उसका बेटा चक्रधर उसे परेशान कर रहे हैं, उसका नल कनेक्शन काट दिया है। एसडीओ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए थे कि वह उक्त संपत्ति अपने पिता जगदीश को हस्तांतरित कर दे, वरना तहसीलदार और पुलिस की मदद से खाली कराया जाएगा। एसडीओ के इस आदेश को चक्रधर ने चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने एसडीओ के आदेश को उचित करार देते हुए याचिका निरस्त कर दी। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली व शासकीय अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा ने पक्ष रखा।
