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विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी

झाबुआ में हुई 158 प्रतिशत बलात्कार के मामलों की वृद्धि
भोपाल। जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि विधानसभा में पूछे सवाल में गृह मंत्री ने जवाब दिया है कि प्रदेश में प्रदेश में 2024 में प्रतिदिन 20 बलात्कार हुए। वर्ष 2020 में बलात्कार की घटनाएं 6134 से बढक़र 2024 में 7294 हो गई जिसमें 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दी गई जानकारी ने बताया गया है कि वर्ष 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन में दिए गए बलात्कार के कुल प्रकरण 5374 की जानकारी सत्य है, वास्तव में 2023 में बलात्कार के 7202 प्रकरण हुए तथा इस अवधि में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के प्रकरणों की संख्या 3831 है, जबकि वार्षिक प्रतिवेदन में 883 प्रकरण बताए गए। महिलाओं से बलात्कार की घटनाएं पिछले 5 वर्षों में अनुसूचित जाति में 10 प्रतिशत बृद्धि, अनुसूचित जनजाति में 26 प्रतिशत की बृद्धि, पिछड़ा वर्ग की 20 प्रतिशत तथा सामान्य में 24 प्रतिशत में वृद्धि हुई ।
दी गई जानकारी अनुसार पिछले पांच वर्षों में बलात्कार की घटनाओं में सबसे ज्यादा वृद्धि 158 प्रतिशत झाबुआ जिले में हुई, इंदौर शहर में 103 प्रतिशत, इंदौर ग्रामीण में 69 प्रतिशत भोपाल शहर में 59 प्रतिशत रतलाम में 46 प्रतिशत वृद्धि हुई जबकि वालाघाट में 33 प्रतिशत जबलपुर में 15 प्रतिशत की कमी हुई, गुना, अशोकनगर, भिंड, बुरहानपुर, शाजापुर, कटनी, शिवानी, पन्ना , सतना, अनूपपुर ,राजगढ़ में कमी हुई।
18 परसेंट को सजा हुई 82 प्रतिशत हुए बरी
विधायक पंकज उपाध्याय द्वारा न्यायालय में बलात्कारों के प्रकरण की सक्सेस रेट पूछने पर बताया कि पिछले पांच वर्षों में महिला बलात्कार की अनुसूचित जाति के 2739 प्रकरणों के फैसले हुए जिसमें 23 प्रतिशत को सजा तथा 77 प्रतिशत बरी हुए। अनुसूचित जनजाति में 3163 फैसले में 22 प्रतिशत को सजा तथा 78 प्रतिशत बरी हुए, पिछड़ा वर्ग के 3982 फैसले में 21 प्रतिशत को सजा तथा 79 प्रतिशत बरी हुए तथा सामान्य के 1222 फैसलो में 18 परसेंट को सजा हुई तथा 82 प्रतिशत बरी हुए ।
साढ़े तीन गुना ज्यादा
जवाब में कहा कि महिला बलात्कार की कुल संख्या 5374 महिला सुरक्षा शाखा द्वारा तथा अनुसूचित जाति तथा जनजाति की संख्या 883 आजाक शाखा पुलिस मुख्यालय की जानकारी पर दी गई थी जिलो से जानकारी एकत्रित करने पर वास्तविक संख्या 7202 तथा 3831 पाई गई। विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वार्षिक प्रतिवेदन में महिलाओ से कुल बलात्कार के आंकड़े 40 प्रतिशत बास्तविक संख्या से 40 प्रतिशत ज्यादा तथा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जनजाति के आंकड़े 340 प्रतिशत ज्यादा यानी है साढ़े तीन गुना ज्यादा है।

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