
अमेठी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद से स्मृति ईरानी अमेठी नहीं लौटीं, जिससे बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक जहां हैरान-परेशान हैं वहीं उनमें खासी निराशा भी देखने को मिल रही है। अमेठी के मेदन मवई गांव में बने उनके घर पर अब सन्नाटा पसरा है। बीजेपी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग कहते हैं कि अगर राहुल गांधी की हार से उन्होंने सबक लिया होता, तो आज हालात कुछ और होते।
टीवी के पर्दे पर अपनी धाक जमाने के बाद राजनीति में कदम रखने वाली स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराकर इतिहास रचने जैसा काम करके दिखाया था। इस जीत से अभिभूत हो स्मृति ने अमेठी को अपना घर बताया और ‘दीदी आपके द्वार’ अभियान शुरू किया था। यहां पर उन्होंने घर भी बनवाया और खुद को अमेठी की बेटी बता कर कभी क्षेत्र से दूर नहीं जाने जैसी बातें कीं।
चुनावी हार ने बदला सब कुछ
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी, कांग्रेस के नेता किशोरी लाल शर्मा से चुनाव हार गईं। बताया जा रहा है कि इस हार के बाद से ही न तो उन्होंने कभी अमेठी का दौरा किया और न ही अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात ही की है। उनकी इस तरह से अमेठी छोड़ने से हैरान-परेशान बीजेपी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग अब भी उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
घर में मिलते हैं केयरटेकर
स्मृति ईरानी के घर के केयरटेकर ध्रुवराज ही यहां मिलते हैं। वो खुद भी यही कहते हैं कि अब इस घर में सिर्फ वही रहते हैं। वो बताते हैं कि इस घर में पूजा-पाठ करने के लिए पंडित जरुर आते हैं और इसके अलावा साफ-सफाई के लिए भी कर्मचारी आते हैं, लेकिन घर पहले जैसा नहीं रहा।
लोग पूछते हैं हम क्या जवाब दें
बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि दीदी कम से कम उन बूथों पर तो आतीं, जहां से उन्हें वोट मिले थे। दु:खी मन से कार्यकर्ता कहते हैं कि हमसे लोग पूछते हैं कि दीदी कहां हैं, लेकिन हमें खुद कुछ नहीं पता। न उन्होंने फोन किया, न खुद आईं। ऐसे में सभी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या स्मृति ईरानी अमेठी की जनता से फिर जुड़ने की कोशिश करेंगी या यह घर सिर्फ एक राजनीतिक याद बनकर रह गया है? वैसे समर्थकों को तो पूरी उम्मीद है कि वो जल्द ही अपने घर को लौटेंगी और अमेठी से रिश्ता नहीं तोड़ेंगी।
