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हाइकोर्ट ने कहा जिसके शरीर के टुकड़े रेलवे ट्रैक पर बिखरे हों उससे टिकट कैसे मांग सकते
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस प्रेमनारायण सिंह की बेंच ने एक मुआवजा अपील स्वीकार करते हुए रेलवे विभाग को आदेश दिए कि ट्रेन से गिरकर कटने से मृत व्यक्ति की पत्नी और दो बच्चों को 8 लाख रु. मुआवजा राशि ब्याज सहित आठ सप्ताह में अदा करें। इसके पहले मुआवजा दावा रेलवे ट्रिब्यूनल भोपाल और दिल्ली द्वारा अलग-अलग निर्णयों के चलते विलंबित था। जिस पर हाइकोर्ट इन्दौर में अपील याचिका दायर की गई थी। अपील की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मुआवजा राशि देने के आदेश के साथ यह सवाल भी उठाया कि जिसके शरीर के टुकड़े रेलवे पटरी पर बिखरे हों, उससे रेलवे टिकट कैसे मांग सकते हैं। मृतक के परिजनों ने हाइकोर्ट में अपील याचिका एडवोकेट ऋषि तिवारी के जरिए दायर की थी। याचिकाकर्ता के एड्वोकेट के अनुसार घटना 1 जून 2014 को उस समय की है जब अर्जुन पाल ट्रेन से महू से रतलाम यात्रा कर रहा था। भीड़ के कारण उतरते समय वह चलती ट्रेन की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। उसकी पत्नी बिंदू पाल, बेटे तुशाल व बेटी तेजस्वी की ओर से मांगा गया मुआवजा रेलवे ने यह कहते हुए देने से इंकार कर दिया कि मृतक के पास रेलवे टिकट नहीं मिला। इसलिए यह प्रमाणित यात्री नहीं है और यह भी प्रमाणित नहीं होता है कि उसने ट्रेन से यात्रा की थी। इस पर रेलवे ट्रिब्यूनल भोपाल में केस लगाया जहां दो सदस्यीय ट्रिब्यूनल का अलग-अलग निर्णय आया। एक सदस्य ने मुआवजा राशि देने की बात कही तो दूसरे ने यह मांग रिजेक्ट कर दी। इसके बाद दिल्ली ट्रिब्यूनल ने भी मुआवजे की मांग अमान्य कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट इंदौर में अपील दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद अपने निर्णय में पीड़ित को मुआवजा राशि देने का फैसला सुनाते यह सवाल उठाया कि जब मृतक के शरीर के अंग के टुकड़े रेलवे ट्रैक पर बिखरे हों तो उससे रेलवे टिकट कैसे मांग सकते हैं।

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