
रिश्वत लेते धराए मुख्य आरोपी फरार एएसआई पवन रघुवंशी को बर्खास्त करने की तैयारी
भोपाल। राजधानी भोपाल में पकड़ाये फर्जी कॉल सेंटर के आरोपियों को बचाने के लिए रिश्वत लेने के मामले में आरोपियों मे शामिल फरार आरोपी प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को भी हाईकोर्ट जबलपुर ने उसकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए जमानत का लाभ दे दिया है।
गौरतलब है कि मामले में इससे पहले मामले में आरोपी बनाये गये ऐशबाग टीआई को तो हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। लेकिन पूरे मामले में मुख्य आरोपी सस्पेंड और फरार एएसआई पवन सिंह रघुवंशी को कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इंकार करते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। फरार आरोपी प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को मंगलवार को जमानत दी गई है, मुख्य आरोपी एएसआई पवन रघुवंशी का कहना था, कि फर्जी कॉल सेंटर मामले में आरोपियो को बचाने के लिये रिश्वत की जो डील की गई थी, उसमें थाना प्रभारी जितेंद्र गढ़वाल, एएसआई मनोज सिंह, हेड कॉन्स्टेबल धर्मेंद्र सिंह समेत अन्य शामिल हैं। पवन रघुवंशी द्वारा पुलिस को दिए बयानों के मुताबिक, मामले में मुख्य आरोपी अफजल खान के साले मुईन खान, उसके भाई वसीम खान और अफजल की पत्नी जाहिदा को आरोपी न बनाने के लिए रिश्वत मांगी गई थी। टीआई जितेंद्र गढ़वाल के कहने पर पवन और साथी एएसआई मनोज सिंह, प्रधान आरक्षक धर्मेद्र सिंह ने पूरी डील की थी।
जिसकी पहली किश्त के तौर पर पॉच लाख रुपए पवन ने अपने घर पर फरार पार्षद अंशुल उर्फ मोना जैन से लिए थे। सूचना मिलने पर एसीपी सुरभी मीणा और उनकी टीम ने 5 मार्च को रेड मारते हुए पवन के घर से रिश्वत में ली गई 4 लाख 94 हजार की रकम को जप्त किया था। जानकारी के मुताबिक एएसआई पवन को 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था, उसने फर्जी कॉल सेंटर मामले में साइबर ठगी के 3 आरोपियों को बचाने के लिए 25 लाख की मांग की थी। मुख्य आरोपी फरार एएसआई पवन रघुवंशी को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं अन्य तीनों आरोपियों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। पुलिस टीमें लगातार सभी फरार आरोपी पुलिसकर्मियों की तलाश कर रही हैं। वहीं मामले में टीकमगढ़ के पार्षद अंशुल उर्फ मोना जैन, बीजेपी नेता मोइन खान भी फरार हैं।
पुलिस की हिरासत से फरार हुआ था पवन
मामले मे पहले कोर्ट में एसीपी के प्रतिवेदन से साफ हो चुका है, कि पवन को हिरासत में लिया जा चुका था। इसके बाद वह फरार हुआ है, हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत से भागने का प्रकरण उसके खिलाफ दर्ज नहीं कराया गया। जिन अधिकारी-कर्मचारियों की हिरासत से वह भागा, उनकी जिम्मेदारी भी तय नहीं की गई है। कोर्ट की ऑर्डरशीट में भी इस बात का जिक्र है, कि हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है, कि पवन को जमानत पर छोड़ा गया अथवा उसे गिरफ्तार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसे जमानत देने से इंकार कर दिया था।
बैंक खाते और कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
फर्जी कॉल सेंटर के कर्मचारियों के करीब 50 खातों की जानकारी पुलिस को मिली थी। साथ ही टीम ने 29 सिम और करीब 100 कंप्यूटर जब्त किये है। गिरोह का मास्टरमाइंड अफजल खान जेल में है। आगे की जांच में पता चला कि ऐशबाग टीआई जितेंद्र गढ़वाल और कुछ पुलिसकर्मी कॉल सेंटर संचालकों के साथ मिले हुए थे। लापरवाही और सांठगांठ के आरोप में ऐशबाग टीआई जितेंद्र गढ़वाल समेत 4 पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड किया गया। वहीं थाना प्रभारी जितेंद्र गढ़वाल, एएसआई पवन रघुवंशी, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र सिंह और रिश्वत देते हुए पकड़ाया अंशुल जैन के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। मामले में ऐशबाग टीआई जितेंद्र गढ़वाल और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है।
