
हाई कोर्ट ने अपील निरस्त कर दुर्घटना मृत्यु दावाकर्ताओं के हक में सुनाया आदेश
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की वह अपील निरस्त कर दी, जिसके जरिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि कम करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने बीमा कंपनी की मांग को अनुचित पाते हुए दुर्घटना मृत्यु दावाकर्ताओं के हक में राहतकारी आदेश पारित कर दिया। जिसमें कहा गया है कि जो क्षतिपूर्ति राशि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने तय की थी, उससे सात लाख अधिक भुगतान किए जाएं। यह राशि अविलंब मृतिका के पिता के खाते में जमा की जाए।
दावाकर्ता मंडला निवासी छोटेराम टेकाम सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता परितोष त्रिवेदी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने तीन लाख 78 हजार रुपये क्षतिपूर्ति राशि तय की थी। बीमा कंपनी वह अदा करने के स्थान पर राशि कम करने की अनुचित मांग के साथ हाई कोर्ट चली आई है। इसलिए न केवल उसकी अपील निरस्त करने योग्य है बल्कि क्षतिपूर्ति राशि में वृद्धि भी अपेक्षित है। ऐसा इसलिए क्योंकि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने अपेक्षाकृत कम क्षतिपूर्ति राशि नियत की थी। हाई कोर्ट ने यह मांग स्वीकार करते हुए 11 लाख 60 हजार 840 भुगतान करने का आदेश सुना दिया।
क्या था मामला …
ग्राम घुघरी जिला मंडला निवासी छोटेलाल टेकाम द्वारा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, मंडला में अपनी पुत्री रीता टेकाम की एक्सीडेंट में हुई मृत्यु के लिए मुआवजे की मांग का दावा किया था। रीता अतिथि शिक्षक थी उसकी ट्रक एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी। अधिवक्ता परितोष त्रिवेदी ने दलील दी कि दावाकर्ता यदि मुआवजा बढ़ाने हेतु हाई कोर्ट में अपील प्रस्तुत नहीं कर सका है, तब भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत के परिपेक्ष में हाई कोर्ट मुआवजा राशि बढ़ा सकता है। कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर अपने आदेश में कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का पूर्व आदेश संशोधित किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक 22 वर्षीय युवती, जो अतिथि शिक्षक थी, उसकी उसकी एक्सीडेंट में मृत्यु पर अत्यंत कम मुआवजा प्रदान किया गया है, जो अनुचित है।
